Sunday, 8 November 2026
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वैज्ञानिक पशुपालन से बदलेगी गांव की तस्वीर, आय बढ़ाने पर रहा फोकस

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में चौसा प्रखंड के सरेंजा पंचायत में एक अहम पहल देखने को मिली, जहां पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य केवल पशुओं के इलाज तक सीमित न रहकर पशुपालकों की आय में स्थायी वृद्धि और आजीविका के सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित रहा।

वैज्ञानिक पशुपालन से बदलेगी गांव की तस्वीर, आय बढ़ाने पर रहा फोकस

केटी न्यूज/चौसा

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में चौसा प्रखंड के सरेंजा पंचायत में एक अहम पहल देखने को मिली, जहां पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य केवल पशुओं के इलाज तक सीमित न रहकर पशुपालकों की आय में स्थायी वृद्धि और आजीविका के सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित रहा।कार्यक्रम के दौरान यह संदेश प्रमुखता से उभरा कि वैज्ञानिक पशुपालन अपनाकर ग्रामीण परिवार अपनी आमदनी को दोगुना कर सकते हैं। विशेषज्ञों ने पशुपालन को पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ाने के बजाय आधुनिक तकनीकों से जोड़ने पर जोर दिया।

वैज्ञानिक पशुपालन से बदलेगी गांव की तस्वीर, आय बढ़ाने पर रहा फोकस

उन्होंने बताया कि सही समय पर टीकाकरण, संतुलित आहार और साफ-सुथरे पशु आवास से न केवल पशुओं की सेहत सुधरती है, बल्कि दुग्ध उत्पादन और बाजार में उनकी कीमत भी बढ़ती है।शिविर में पशुपालकों को यह भी समझाया गया कि पशुओं में होने वाली मौसमी बीमारियों की समय रहते पहचान कर नुकसान से बचा जा सकता है। प्राथमिक उपचार, नियमित स्वास्थ्य जांच और कृमिनाशक दवाओं के उपयोग से पशुपालन कम खर्च में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय बन सकता है। कई पशुपालकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जानकारी के अभाव में पहले उन्हें नुकसान उठाना पड़ता था, लेकिन ऐसे कार्यक्रम उन्हें सही दिशा दिखा रहे हैं।

वैज्ञानिक पशुपालन से बदलेगी गांव की तस्वीर, आय बढ़ाने पर रहा फोकस

जीविका से जुड़े अधिकारियों और समन्वयकों ने समूह आधारित पशुपालन मॉडल पर भी चर्चा की, जिससे छोटे पशुपालक मिलकर बड़े स्तर पर उत्पादन और विपणन कर सकें। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि ग्रामीण युवाओं को गांव में ही टिकाऊ आजीविका का विकल्प मिलेगा।कुल मिलाकर यह कार्यक्रम पशुपालन को सिर्फ सहायक गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की मजबूत धुरी के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हुआ।

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