बच्चियों के स्कूल में सुरक्षा का ‘संकट’, शाम होते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा

नगर पंचायत चौसा के घनी आबादी वाले इलाके में स्थित बालिका मध्य विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। नगर क्षेत्र में बालिकाओं के लिए एकमात्र विद्यालय होने के बावजूद परिसर आज तक चहारदीवारी से महरूम है। चारों ओर से खुला विद्यालय परिसर छुट्टी के बाद असामाजिक तत्वों के लिए आसान पहुंच का स्थान बन जाता है।

बच्चियों के स्कूल में सुरक्षा का ‘संकट’, शाम होते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा

__ चहारदीवारी के अभाव में खुला पड़ा बालिका मध्य विद्यालय परिसर, छात्राओं की सुरक्षा से लेकर सरकारी संपत्ति तक पर मंडरा रहा खतरा; आवेदन के बावजूद शिक्षा विभाग की कार्रवाई फाइलों में अटकी

केटी न्यूज/चौसा।

नगर पंचायत चौसा के घनी आबादी वाले इलाके में स्थित बालिका मध्य विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। नगर क्षेत्र में बालिकाओं के लिए एकमात्र विद्यालय होने के बावजूद परिसर आज तक चहारदीवारी से महरूम है। चारों ओर से खुला विद्यालय परिसर छुट्टी के बाद असामाजिक तत्वों के लिए आसान पहुंच का स्थान बन जाता है। इससे छात्राओं की सुरक्षा के साथ विद्यालय की संपत्ति की निगरानी भी चुनौती बनी हुई है।स्थानीय लोगों के अनुसार, दिन में विद्यालय में पढ़ाई होती है, लेकिन शाम ढलते ही परिसर का माहौल बदल जाता है। चहारदीवारी नहीं होने का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों का आवागमन बढ़ जाता है। कई बार परिसर में शराबियों के जमावड़े की भी शिकायत सामने आती रही है।

ऐसे में विद्यालय में पढ़ने वाली बच्चियों के अभिभावक सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। विद्यालय परिसर में गंदगी फैलाने और सामान को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं से भी समस्या गंभीर बनी हुई है।विद्यालय के प्रधानाध्यापक लालजी चौधरी ने बताया कि चहारदीवारी निर्माण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। इस संबंध में जिला शिक्षा विभाग के अलावा राज्य सरकार के संबंधित विभागीय पोर्टल पर भी आवेदन किया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक निर्माण को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।प्रधानाध्यापक के मुताबिक, विद्यालय चारों ओर से खुला रहने के कारण छुट्टी के बाद परिसर की निगरानी करना मुश्किल हो जाता है। इससे विद्यालय की संपत्ति की सुरक्षा भी प्रभावित होती है।

वहीं, छात्राओं के लिए सुरक्षित और भयमुक्त शैक्षणिक माहौल बनाए रखना भी चुनौती बन गया है।अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन तथा शिक्षा विभाग से मामले को गंभीरता से लेते हुए विद्यालय में शीघ्र चहारदीवारी निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बालिकाओं के एकमात्र विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को किसी हादसे का इंतजार किए बिना दुरुस्त किया जाना चाहिए। चहारदीवारी का निर्माण होने से विद्यालय परिसर की सुरक्षा मजबूत होगी और छात्राओं को सुरक्षित माहौल में पढ़ाई का अवसर मिल सकेगा।