नशा मुक्त समाज की ओर मजबूत पहल
नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को समाज के लिए गंभीर चुनौती मानते हुए सोमवार को सिविल कोर्ट, बक्सर स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सभागार में “नशा मुक्तिरू जागरूकता, रोकथाम एवं पुनर्वास” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ‘ड्रग अवेयरनेस एंड वेलनेस नेविगेशन’ (मादक पदार्थ जागरूकता एवं स्वास्थ्य मार्गदर्शन) योजना के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बक्सर तथा बक्सर मेडिकल सिटी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
-- सिविल कोर्ट परिसर में ‘नशा मुक्ति जागरूकता, रोकथाम एवं पुनर्वास’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित
केटी न्यूज/बक्सर
नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को समाज के लिए गंभीर चुनौती मानते हुए सोमवार को सिविल कोर्ट, बक्सर स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सभागार में “नशा मुक्तिरू जागरूकता, रोकथाम एवं पुनर्वास” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ‘ड्रग अवेयरनेस एंड वेलनेस नेविगेशन’ (मादक पदार्थ जागरूकता एवं स्वास्थ्य मार्गदर्शन) योजना के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बक्सर तथा बक्सर मेडिकल सिटी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे पंजीकरण एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ।

इसके उपरांत दीप प्रज्वलित कर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बक्सर काजल झांब ने संगोष्ठी का विधिवत उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और पूरे समाज को प्रभावित करता है। नशा पीड़ित व्यक्तियों को अपराधी नहीं, बल्कि रोगी के रूप में देखते हुए उनके उपचार और पुनर्वास पर विशेष बल दिया जाना चाहिए।मंच पर प्रिंसिपल जज फैमिली कोर्ट मनोज कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-1 उदय प्रताप सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-2 मनीष कुमार शुक्ला, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-3 सुदेश कुमार श्रीवास्तव, जिला बार एसोसिएशन के सचिव विंदेश्वरी प्रसाद पाण्डेय तथा फाउंडेशन के निदेशक श्रीराम नारायण उपस्थित रहे।

सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि नशा मुक्ति के लिए सामाजिक जागरूकता, संस्थागत सहयोग और सामूहिक प्रयास अनिवार्य हैं।कार्यक्रम के अगले सत्र में फाउंडेशन के निदेशक श्रीराम नारायण ने मादक पदार्थ जागरूकता एवं स्वास्थ्य मार्गदर्शन योजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि नशा मुक्ति के लिए समाज, चिकित्सा क्षेत्र और न्याय व्यवस्था के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए परामर्श, उपचार और पुनर्स्थापन की व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर बल दिया।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नेहा दयाल ने नशा उन्मूलन में न्यायपालिका की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रभावित व्यक्तियों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे उपचार एवं पुनर्वास की प्रक्रिया से जुड़ सकें।

सदर अस्पताल, बक्सर के मनोवैज्ञानिक के. के. पांडेय ने नशे के दुष्प्रभाव, रोकथाम के उपाय तथा उपलब्ध उपचार सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि परिवार का सहयोग और सकारात्मक वातावरण नशा मुक्ति की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।संगोष्ठी के दौरान कानूनी सहायता एवं पुनर्वास प्रक्रिया पर विशेष प्रस्तुति दी गई, जिसमें उपचार, परामर्श और समाज में पुनर्स्थापन की समुचित व्यवस्था पर चर्चा की गई। नशा मुक्ति विषय पर पोस्टर बनाकर लाने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया गया, जिससे युवाओं में विशेष उत्साह देखा गया।

पहले सत्र का संचालन सिविल जज नेहा त्रिपाठी ने किया, जबकि अन्य सत्रों का संचालन वैष्णवी मिश्रा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन स्नेहा कुमारी चौरसिया ने किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डीएलएसए के दीपेश जी, सुधीर जी तथा फाउंडेशन के अजय कुमार, कृष्ण जायसवाल, इंद्रजीत चौबे और मुकेश कुमार खरवार का सराहनीय योगदान रहा।यह संगोष्ठी नशा मुक्त एवं स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में एक सार्थक और प्रेरणादायी पहल साबित हुई, जिसमें उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक संकल्प लेकर जागरूकता फैलाने का संदेश दिया।
