बारूपुर में सुहलदेव–जगदेव जयंती: इतिहास के पुनर्लेखन और सामाजिक अधिकारों की उठी हुंकार
प्रखंड के बारूपुर गांव में महाराजा सुहलदेव और बिहार लेनिन शहीद जगदेव प्रसाद की जयंती समारोह सामाजिक चेतना और राजनीतिक विमर्श का मंच बन गया। कार्यक्रम का आयोजन सुभासपा के तत्वावधान में किया गया, जिसकी अध्यक्षता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उदयनारायण राजभर ने की, जबकि संचालन संजय कुशवाहा ने किया। समारोह की शुरुआत महापुरुषों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर और नारेबाजी के साथ हुई, जिससे माहौल जोश और प्रतिबद्धता से भर उठा।
केटी न्यूज/राजपुर
प्रखंड के बारूपुर गांव में महाराजा सुहलदेव और बिहार लेनिन शहीद जगदेव प्रसाद की जयंती समारोह सामाजिक चेतना और राजनीतिक विमर्श का मंच बन गया। कार्यक्रम का आयोजन सुभासपा के तत्वावधान में किया गया, जिसकी अध्यक्षता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उदयनारायण राजभर ने की, जबकि संचालन संजय कुशवाहा ने किया। समारोह की शुरुआत महापुरुषों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर और नारेबाजी के साथ हुई, जिससे माहौल जोश और प्रतिबद्धता से भर उठा।

मुख्य अतिथि के रूप में सुभासपा के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव अरविंद राजभर के आगमन पर कार्यकर्ताओं ने पुष्प वर्षा और माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया। अपने संबोधन में अरविंद राजभर ने इतिहास के एकतरफा लेखन पर सवाल उठाते हुए कहा कि महाराजा सुहलदेव जैसे योद्धाओं को लंबे समय तक इतिहास के पन्नों से जानबूझकर ओझल रखा गया। उन्होंने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा कि जब तक समाज अपने नायकों के विचारों को आत्मसात नहीं करेगा, तब तक वास्तविक परिवर्तन संभव नहीं है।

उन्होंने दावा किया कि पार्टी के संघर्षों के कारण आज महाराजा सुहलदेव की पहचान व्यापक समाज तक पहुंच रही है और आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश में भव्य जयंती समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें लाखों लोग शामिल होंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति में भी सुभासपा ने नई हलचल पैदा की है और समाज के वंचित तबके अब अपने अधिकारों के लिए मुखर हो रहे हैं।

कार्यक्रम में बिहार प्रदेश सलाहकार दिनेश, रीना पासवान, प्रदेश प्रभारी रामानंद वर्मा, महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष अंजली राजभर सहित आमोद यादव, फागु सिंह, जितेंद्र राजभर, हीरालाल राजभर, संतोष राजभर, वशिष्ठ राजभर, श्रीकांत राजभर और नंदू राजभर ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने सामाजिक न्याय, इतिहास की पुनर्स्थापना और संगठनात्मक मजबूती पर जोर दिया।
