सोवां में वोट नहीं देने पर दबंगो के हमले में घायल व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत, बढ़ा तनाव
सोवा गांव में चुनावी रंजिश में हुए हमले में गंभीर रूप से घायल सुरेंद्र पासवान की बुधवार को पटना में इलाज के दौरान मौत हो गई। ग्रामीणों के बीच शव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया, वहीं पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। घटना ने इलाके की राजनीतिक और सामाजिक तापमान को अचानक बढ़ा दिया है।

केटी न्यूज/कृष्णाब्रह्म
सोवा गांव में चुनावी रंजिश में हुए हमले में गंभीर रूप से घायल सुरेंद्र पासवान की बुधवार को पटना में इलाज के दौरान मौत हो गई। ग्रामीणों के बीच शव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया, वहीं पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। घटना ने इलाके की राजनीतिक और सामाजिक तापमान को अचानक बढ़ा दिया है।
जानकारी के अनुसार, 8 नवंबर की शाम विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि सुरेंद्र पासवान के परिवार ने “तीन तारा” चुनाव चिन्ह पर वोट नहीं दिया। इसी बात पर आक्रोशित लोगों ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौज की और देखते ही देखते स्थिति मारपीट में बदल गई। दर्ज एफआईआर के मुताबिक, आरोपियों ने एकजुट होकर लाठी-डंडों से हमला किया, जिसमें सुरेंद्र पासवान गंभीर रूप से घायल हुए थे।
गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें पटना रेफर किया गया था, जहां करीब एक सप्ताह तक इलाज चला। बुधवार को उनकी मौत की खबर मिलते ही गांव में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया।
-- 17 नामजद, तीन गिरफ्तार, बाकियों की तलाश में दबिश
घटना के बाद मृतक की पुत्रवधु ने सत्येंद्र महतो, राजन कुमार, मिथिलेश कुमार सहित कुल 17 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब मौत के बाद मामला और गंभीर हो गया है।कृष्णाब्रह्म थानाध्यक्ष संदीप कुमार राम ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है तथा फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था को किसी भी हाल में बिगड़ने नहीं दिया जाएगा।
-- मौत के बाद मामले की धारा बढ़ने की संभावना
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना महज विवाद नहीं, बल्कि योजनाबद्ध हमला था। सुरेंद्र पासवान की मौत के बाद एफआईआर में लगी धाराएं बढ़ने की उम्मीद है। वहीं पुलिस पूरे मामले को संवेदनशील मानते हुए गांव में अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी रंजिश के खतरनाक रूप को उजागर कर दिया है।
-- आरटीआई कार्यकर्ता ने अपर मुख्य गृह सचिव को लिखा था पत्र
बता दें कि इस मामले में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए डुमरांव के आरटीआई कार्यकर्ता रामजी सिंह ने बिहार सरकार के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिख चुनावी रंजिश में सोवां के अनुसूचित जाति समुदाय के सुरेन्द्र पासवान पर हुए जानलेवा हमले के फरार आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग की थी।अपर मुख्य गृह सचिव को दिए पत्र में उन्होंने जिक्र किया था कि चुनावी रंजिश में मारपीट से जख्मी की हालत चिंताजनक बनी हुई है।

