15वीं व षष्ठम वित्त की राशि सड़कों-नालियों तक सीमित, पंचायत विकास पर उठे सवाल

प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की कार्यशैली को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रतिनिधि अपने कार्यकाल में विकास कार्यों को केवल सड़क निर्माण, मरम्मती और नाली निर्माण तक ही सीमित रखे हुए हैं। 15वीं एवं षष्ठम वित्त आयोग की राशि का अधिकांश हिस्सा इन्हीं मदों में खर्च किया जा रहा है, जबकि पंचायतों के समग्र विकास के लिए अन्य कई योजनाएं उपलब्ध हैं।

15वीं व षष्ठम वित्त की राशि सड़कों-नालियों तक सीमित, पंचायत विकास पर उठे सवाल

पीके बादल/केसठ

प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की कार्यशैली को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रतिनिधि अपने कार्यकाल में विकास कार्यों को केवल सड़क निर्माण, मरम्मती और नाली निर्माण तक ही सीमित रखे हुए हैं। 15वीं एवं षष्ठम वित्त आयोग की राशि का अधिकांश हिस्सा इन्हीं मदों में खर्च किया जा रहा है, जबकि पंचायतों के समग्र विकास के लिए अन्य कई योजनाएं उपलब्ध हैं। लोगों का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पुस्तकालय, सामुदायिक भवन, जल संरक्षण,जिम,पार्क और सार्वजनिक उपयोग की अन्य स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि दर्जनों योजनाओं की स्वीकृति के बावजूद पंचायतों में नवाचार या दीर्घकालिक लाभ देने वाली योजनाओं का अभाव है। पंचायतों के विकास की परिकल्पना केवल सड़क और नाली तक सिमट कर रह गई है। कई पंचायतों में एक ही वार्ड या क्षेत्र में बार-बार मरम्मती कार्य कर राशि खर्च की जा रही है, जबकि अन्य बुनियादी जरूरतें अधूरी पड़ी हैं। युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्र, महिलाओं के लिए प्रशिक्षण भवन, पुस्तकालय या डिजिटल सुविधा केंद्र जैसे कार्य कहीं नजर नहीं आ रहे हैं।

फोटो 1 -सोनू तिवारी 

सोनू तिवारी का कहना है कि हर साल वित्त आयोग की राशि आती है, लेकिन पंचायत में कोई नई सोच या स्थायी विकास कार्य दिखाई नहीं देता। सिर्फ सड़क और नाली बनाकर विकास का दावा किया जाता है।

फोटो 2 - सुमेश्वर यादव

समाजसेवी सुमेश्वर यादव कहा कहना है कि गांव में पुस्तकालय,जिम, पार्क आदि की जरूरत है, लेकिन इन पर कोई पहल नहीं हो रही। प्रतिनिधि आसान और पारंपरिक योजनाओं में ही राशि खर्च कर रहे हैं।

फोटो 3- रजनीकांत दूबे उर्फ जुगनू दूबे

समाजसेवी रजनीकांत दूबे उर्फ जुगनू दूबे का कहना है कि यदि योजनाओं की सही प्राथमिकता तय की जाए तो पंचायतों का समग्र विकास संभव है।

फोटो 4 - रजनीश यादव

समाजसेवी रजनीश यादव का कहना है कि गांव में युवाओं के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सार्वजनिक पुस्तकालय की जरूरत है लेकिन प्रतिनिधियों के द्वारा इस ओर कोई पहल नहीं किया जा रहा है।युवा केवल वोट देने तक ही रह गए है।

फोटो 5 - मुकुंदजी प्रसाद

वार्ड सदस्य सह समाजसेवी मुकुंदजी प्रसाद का कहना है कि गांव में वाहन पार्किंग और महिलाओं के लिए सार्वजनिक शौचालय की जरूरत है लेकिन केसठ नया बाजार में इसकी सुविधा नहीं है।जिसके कारण वाहन चालकों और बाजार करने आई महिलाओं को दिक्कत होती है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वित्त आयोग की राशि के उपयोग की समीक्षा कराई जाए और पंचायतों में विविध विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि पंचायत स्तर पर जनसुनवाई कर लोगों की वास्तविक जरूरतों के आधार पर योजनाएं बनाई जाएं। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो पंचायतों का विकास एकांगी रह जाएगा और सरकार की मंशा के अनुरूप समावेशी विकास का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा।यदि योजनाओं में नवाचार और संतुलन लाया गया तो पंचायतों का विकास वास्तव में आदर्श मॉडल बन सकता है।