नई नौकरी की खुशी कुछ ही दिनों में मातम में बदली, रजनीश की मौत ने छोड़े कई सवाल
नई नौकरी, आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने और परिवार के लिए बेहतर जिंदगी की उम्मीद... रजनीश कुमार की जिंदगी अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुई थी कि एक संदिग्ध हादसे ने सब कुछ खत्म कर दिया। डुमरांव स्थित बीएमपी-4 परिसर में प्रशिक्षण के दौरान तीन मंजिला भवन से गिरकर 24 वर्षीय प्रशिक्षु जवान की मौत ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।


__ कपड़े लेने की बात कहकर तीसरी मंजिल पर गया था प्रशिक्षु जवान, कुछ देर बाद छत से गिरने की मिली खबर; पिता अंतिम दर्शन तक नहीं कर सके, मंझले भाई ने दी मुखाग्नि
केटी न्यूज/डुमरांव
नई नौकरी, आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने और परिवार के लिए बेहतर जिंदगी की उम्मीद... रजनीश कुमार की जिंदगी अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुई थी कि एक संदिग्ध हादसे ने सब कुछ खत्म कर दिया। डुमरांव स्थित बीएमपी-4 परिसर में प्रशिक्षण के दौरान तीन मंजिला भवन से गिरकर 24 वर्षीय प्रशिक्षु जवान की मौत ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजन आत्महत्या की आशंका को सिरे से खारिज करते हुए घटना की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।मृतक गया जिले के वजीरगंज थाना क्षेत्र के कारीसोवां गांव निवासी रजनीश कुमार था। वह बेगूसराय स्थित बिहार सैन्य पुलिस-19 में पदस्थापित था और 19 अगस्त को प्रशिक्षण के लिए डुमरांव आया था। रविवार की शाम करीब चार बजे अचानक उसके भवन से गिरने की सूचना मिली। साथी जवान उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद बक्सर सदर अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

__कपड़े लेने की बात कहकर गया था ऊपर
घटना से पहले रजनीश ने अपने साथियों से बातचीत की थी। परिजनों के अनुसार, उसने कपड़े लेने की बात कही थी और इसी सिलसिले में वह तीसरी मंजिल पर गया था। वह सामान्य तौर पर पहली मंजिल पर रहता था। खास बात यह भी सामने आई है कि वह मोबाइल नीचे ही छोड़कर ऊपर गया था। कुछ देर बाद उसके नीचे गिरने की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया। आखिर वह तीसरी मंजिल तक क्यों गया और वहां से किस परिस्थिति में नीचे गिरा, यह अब भी जांच का विषय बना हुआ है।

__ नौकरी मिलने के बाद बेहद खुश था रजनीश
परिजनों का कहना है कि रजनीश मानसिक रूप से मजबूत था और नौकरी मिलने के बाद बेहद खुश था। इसी वर्ष उसका सीआरपीएफ में भी चयन हुआ था, लेकिन मेडिकल में सफल नहीं होने के बाद उसने बिहार सैन्य पुलिस की नौकरी ज्वाइन की थी। करीब एक महीने पहले ही उसकी नियुक्ति हुई थी। ऑनलाइन पढ़ाई के जरिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर उसने यह मुकाम हासिल किया था। परिवार को उससे बड़ी उम्मीदें थीं।

__ पिता पहुंचे, लेकिन बेटे का चेहरा नहीं देख सके
रजनीश तीन भाइयों और एक बहन में सबसे छोटा था। पिता मिथिलेश कुमार सिंह पहले ई-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। बड़े भाई गुलशन मुंबई में निजी कंपनी में काम करते हैं, जबकि मंझला भाई गोल्डन कुमार नौकरी की तैयारी कर रहा है। घटना के समय पिता मुंबई में बड़े बेटे के पास थे। बेटे की मौत की खबर सुनकर वे गांव के लिए रवाना हुए, लेकिन दुर्भाग्य से अंतिम दर्शन भी नहीं कर सके। सोमवार को शव गांव पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया। हजारों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। मंझले भाई गोल्डन कुमार ने मुखाग्नि दी। पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर जवान को अंतिम विदाई दी।

इधर, पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है। बीएमपी परिसर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और घटना के समय मौजूद जवानों व अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी जांच में अहम माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। फिलहाल रजनीश की मौत कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है।

