छठिया पोखरा घाट के किनारे बालू की बिक्री किये जाने से आम लोगों को हो रही परेशानी

आस्था के रूप में महशहूर छठिया पोखरा के घाट का अतिक्रण किया जा रहा है। इस अतिक्रमण को रोकने को लेकर नप प्रशासन और अनुमंडल प्रशासन की तरफ कोई कवायद शुरू नहीं की गई है। प्रशासनिक पहल नहीं होने के कारण अतिक्रमणकारियों का मनोबल दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। घाट का अब इस्तेमाल व्यवसाय के लिये शुरू कर दिया गया है। सीमेंट, छड़ की बिक्री करने वाले तालाब के किनारे बालू गिराकर घाट का अतिक्रमण करना शुरू कर दिये हैं। इतना ही नहीं उनके द्वारा लोगों के बैठने के लिये बनी छतरी और टहलने वाले रास्ते पर ही बालू गिराकर बिक्री की जा रही है।

छठिया पोखरा घाट के किनारे बालू की बिक्री किये जाने से आम लोगों को हो रही परेशानी

-- बैठने की लिये बनी छतरी को भी बालू गिराकर कर दिया गया है जाम

केटी न्यूज/डुमरांव।   

आस्था के रूप में महशहूर छठिया पोखरा के घाट का अतिक्रण किया जा रहा है। इस अतिक्रमण को रोकने को लेकर नप प्रशासन और अनुमंडल प्रशासन की तरफ कोई कवायद शुरू नहीं की गई है। प्रशासनिक पहल नहीं होने के कारण अतिक्रमणकारियों का मनोबल दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। घाट का अब इस्तेमाल व्यवसाय के लिये शुरू कर दिया गया है। सीमेंट, छड़ की बिक्री करने वाले तालाब के किनारे बालू गिराकर घाट का अतिक्रमण करना शुरू कर दिये हैं। इतना ही नहीं उनके द्वारा लोगों के बैठने के लिये बनी छतरी और टहलने वाले रास्ते पर ही बालू गिराकर बिक्री की जा रही है।मालूम हो कि अनुमंडल कार्यालय और अस्पताल जाने वाले रास्ते में ही छठिया पोखरा पड़ता है।

ऐसे में प्रतिदिन इसी रास्ते से होकर एसडीओ से लेकर अन्य बड़े अधिकारियों की गाड़ियां गुजरती हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। कार्रवाई नहीं होने से अतिक्रमणकारियों का मनोबल और बढ़ता जा रहा है। बालू पूरे रास्ते में बिखरा रहता है, जिससे छोटे-बड़े वाहनों के गुजरने में भी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के दिनों में पानी का बहाव अवरूद्ध हो जाता है, जिससे जलजमाव की समस्या खड़ी हो जाती है। इतना ही नहीं कीचड़ हो जाने से वाहन उसमें फंस भी जाते हैं। सबसे परेशानी तो सुबह-शाम घुमने के लिये निकले महिला-पुरूष को रास्ता बदलना पड़ता है। तालाब में स्नान ध्यान करने वाली महिलाओं को ज्यादा परेशानी होती है, बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।