धान खरीद में सिस्टम फेल, समाजसेवियों ने सहकारिता मंत्री को सौंपा ज्ञापन
ब्रह्मपुर प्रखंड में धान खरीद की सरकारी व्यवस्था किसानों के लिए राहत नहीं, बल्कि नई परेशानी बनती जा रही है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए तय धान खरीद लक्ष्य में कटौती ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। आरोप है कि कृषि विभाग द्वारा भेजी गई त्रुटिपूर्ण उत्पादन रिपोर्ट के कारण सरकार ने खरीद लक्ष्य घटा दिया, जिसका सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
-- कम लक्ष्य, धीमी खरीद और नमी का बहाना, औने-पौने दाम पर फसल बेचने को विवश अन्नदाता
केटी न्यूज/ब्रह्मपुर
ब्रह्मपुर प्रखंड में धान खरीद की सरकारी व्यवस्था किसानों के लिए राहत नहीं, बल्कि नई परेशानी बनती जा रही है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए तय धान खरीद लक्ष्य में कटौती ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। आरोप है कि कृषि विभाग द्वारा भेजी गई त्रुटिपूर्ण उत्पादन रिपोर्ट के कारण सरकार ने खरीद लक्ष्य घटा दिया, जिसका सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।कम लक्ष्य को ढाल बनाकर पैक्स प्रबंधन मनमानी पर उतर आया है। बीते वर्षों की तुलना में इस बार जानबूझकर खरीद धीमी रखी जा रही है। “लक्ष्य पूरा हो गया” या “अब और खरीद संभव नहीं” जैसे तर्क देकर किसानों को टाल दिया जा रहा है। नतीजा यह है कि हफ्तों लाइन में लगने के बाद भी किसानों का धान नहीं खरीदा जा रहा।

-- एमएसपी कागजों में, बाजार में लूट
सरकार जहां 2369 प्रति क्विंटल की न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर चुकी है, वहीं पैक्स की निष्क्रियता के कारण किसान खुले बाजार में 1500 से 1650 प्रति क्विंटल में धान बेचने को मजबूर हैं। यह सीधा-सीधा किसानों की मेहनत पर डाका है। पैक्सों द्वारा 17 प्रतिशत से अधिक नमी का हवाला देकर धान लौटाया जा रहा है, जबकि व्यावहारिक स्तर पर यह शर्त किसानों के लिए लगभग असंभव साबित हो रही है।

-- बिचौलियों की चांदी
खरीद प्रक्रिया में देरी का सबसे बड़ा फायदा बिचौलियों को मिल रहा है। वे किसानों से सस्ते में धान खरीदकर बाद में पैक्स में खपा रहे हैं। किसान घाटे में जा रहे हैं और मुनाफा दलालों की जेब में जा रहा है कि यही आज की जमीनी सच्चाई है।
-- मंत्री तक पहुंची किसानों की आवाज
समाजसेवी शैलेश ओझा और भाजपा नेता शंभू चंद्रवंशी ने सहकारिता मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी से मिलकर इस पूरे मामले से अवगत कराया। उन्होंने ज्ञापन सौंपकर धान खरीद लक्ष्य बढ़ाने, खरीद प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता लाने तथा बिचौलियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।मंत्री ने मामले को गंभीर बताते हुए पैक्सों को निर्देश देने और विशेष रूप से छोटे किसानों से प्राथमिकता के आधार पर खरीद सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया है। अब देखना यह है कि यह आश्वासन जमीन पर उतरता है या फिर किसान इसी तरह सिस्टम की मार झेलते रहेंगे।

