नववर्ष की रात स्टेशन परिसर में दिखी इंसानियत की गर्माहट

कड़ाके की ठंड और नववर्ष की पूर्व संध्या, जब अधिकतर लोग जश्न में डूबे थे, उसी वक्त डुमरांव स्टेशन परिसर में मानवता का एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, जिला उप शाखा डुमरांव ने ठंड से जूझ रहे जरूरतमंद व असहाय लोगों के बीच राहत पहुंचाकर इंसानियत की मिसाल पेश की।

नववर्ष की रात स्टेशन परिसर में दिखी इंसानियत की गर्माहट

-- रेड क्रॉस की पहल से ठंड में कांपे असहायों को मिला राहत का कंबल

केटी न्यूज/डुमरांव

कड़ाके की ठंड और नववर्ष की पूर्व संध्या, जब अधिकतर लोग जश्न में डूबे थे, उसी वक्त डुमरांव स्टेशन परिसर में मानवता का एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, जिला उप शाखा डुमरांव ने ठंड से जूझ रहे जरूरतमंद व असहाय लोगों के बीच राहत पहुंचाकर इंसानियत की मिसाल पेश की।उप शाखा के उपाध्यक्ष सह अनुमंडलाधिकारी राकेश कुमार के नेतृत्व में रेड क्रॉस की टीम देर शाम स्टेशन परिसर पहुंची।

सदस्यों ने प्रतीक्षालय, फुट ओवरब्रिज के नीचे, पूछताछ कार्यालय के आसपास और खुले आसमान के नीचे रहने वाले लोगों को खोज-खोजकर गर्म कंबल ओढ़ाए। यह पहल केवल सामग्री वितरण तक सीमित नहीं रही, बल्कि जरूरतमंदों से संवाद कर उन्हें ठंड से बचाव के उपाय भी बताए गए।बेहतर गुणवत्ता वाले कंबल पाकर असहाय लोगों के चेहरे पर जो संतोष और राहत दिखी, वही इस मानवीय कार्य की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।

कई बुजुर्गों और बेसहारा लोगों ने रेड क्रॉस टीम को आशीर्वाद देते हुए भावुक शब्दों में आभार प्रकट किया। नववर्ष की ठिठुरन भरी रात में यह सहायता उनके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं थी।इस सेवा कार्य में उप शाखा के सचिव मोहन गुप्ता की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। हाल ही में हार्ट अटैक के बाद इलाजरत होने के बावजूद उन्होंने अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई, जो उनके सेवा भाव और समर्पण को दर्शाता है।उनके साथ कोषाध्यक्ष प्रमोद कुमार, आजीवन सदस्य सह समाजसेवी राजीव रंजन सिंह और संतोष शर्मा ने भी पूरे उत्साह के साथ योगदान दिया।

कार्यक्रम के दौरान वरीय सदस्य अनिल कुमार ओझा, शिक्षक रविशंकर सिंह, उपेंद्र तिवारी, सर्वजीत कुमार, संटू मित्रा, अमित पाठक तथा आरपीएफ हवलदार ब्रजेश राय की भी सक्रिय उपस्थिति रही।रेड क्रॉस की यह पहल यह संदेश देती है कि सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के जरिए ही समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है। नववर्ष की शुरुआत में दिया गया यह सेवा संदेश आने वाले समय में औरों को भी मानवता के इस पथ पर चलने के लिए प्रेरित करेगा।