तुलसी की तपोभूमि को मिलेगी नई पहचान, पर्यटन मानचित्र पर चमक सकता है रघुनाथपुर आश्रम
रघुनाथपुर स्थित ऐतिहासिक तुलसी आश्रम को धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। वर्षों से स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों द्वारा उठाई जा रही मांग अब सरकारी स्तर पर गंभीरता से ली जा रही है। मुख्यमंत्री सचिवालय के सहयोग पोर्टल पर दर्ज एक मांग पत्र के बाद जिला प्रशासन, कला एवं संस्कृति विभाग तथा पर्यटन विभाग ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।

__ सरकारी स्तर पर तुलसी महोत्सव आयोजन की मांग को मिली रफ्तार, प्रशासन ने शुरू की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया
केटी न्यूज/ब्रह्मपुर।
रघुनाथपुर स्थित ऐतिहासिक तुलसी आश्रम को धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। वर्षों से स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों द्वारा उठाई जा रही मांग अब सरकारी स्तर पर गंभीरता से ली जा रही है। मुख्यमंत्री सचिवालय के सहयोग पोर्टल पर दर्ज एक मांग पत्र के बाद जिला प्रशासन, कला एवं संस्कृति विभाग तथा पर्यटन विभाग ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।सामाजिक कार्यकर्ता एवं तुलसी विचार मंच के संयोजक शैलेश कुमार ओझा द्वारा 21 मई 2026 को सहयोग पोर्टल पर दर्ज कराए गए आवेदन के आलोक में संबंधित विभागों ने आश्रम की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता का आकलन प्रारंभ कर दिया है।

जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय ने अनुमंडल पदाधिकारी डुमरांव सहित विभिन्न अधिकारियों से विस्तृत प्रतिवेदन एवं सुझाव मांगे हैं। अधिकारियों से आश्रम की विरासत, सांस्कृतिक गतिविधियों तथा इसे संरक्षित धरोहर के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है।वहीं पर्यटन विभाग की पहल और बक्सर सदर विधायक आनंद मिश्र की अनुशंसा के बाद जिला प्रशासन ने भी मामले को प्राथमिकता दी है। जिला पदाधिकारी द्वारा अनुमंडल प्रशासन को भूमि स्वामित्व, स्थल का नक्शा, अनापत्ति प्रमाण पत्र, रखरखाव की व्यवस्था और पर्यटकीय संभावनाओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार पर्यटन विभाग द्वारा पूर्व में मांगी गई कुछ जानकारियां अब तक प्राप्त नहीं हो सकी हैं। इसी कारण संबंधित अधिकारियों को पुनः पत्र भेजकर आवश्यक प्रतिवेदन शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि प्रस्ताव को आगे की स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को भेजा जा सके।रघुनाथपुर का तुलसी आश्रम क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार गोस्वामी तुलसीदास ने यहां लंबे समय तक निवास किया था तथा रामचरितमानस के उत्तरकांड के कुछ अंशों की रचना भी इसी स्थल पर की थी। शाहाबाद गजेटियर में भी उनके रघुनाथपुर प्रवास का उल्लेख मिलता है।

आश्रम परिसर में प्राचीन राम-जानकी मंदिर और महाकालेश्वर मंदिर स्थित हैं। यहां प्रतिवर्ष रामनवमी पर रामोत्सव, सावन में भव्य गंगा महाआरती तथा दो दिवसीय तुलसी महोत्सव का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि तुलसी आश्रम को आधिकारिक पर्यटन स्थल का दर्जा मिलता है और सरकारी स्तर पर नियमित तुलसी महोत्सव शुरू होता है, तो न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी बल्कि पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया संबल मिलेगा। प्रशासन की सक्रियता से अब लोगों को उम्मीद जगी है कि तुलसी की इस ऐतिहासिक तपोभूमि को जल्द ही व्यापक पहचान मिल सकेगी।

