जिला परिषद में घमासान: कर्मचारियों की हड़ताल से ठप पड़ सकता है विकास कार्यों का पहिया
जिला परिषद कार्यालय में चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। जनप्रतिनिधियों और कार्यालय कर्मचारियों के बीच बढ़ते टकराव ने प्रशासनिक कामकाज को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। सरकारी कार्यों में कथित हस्तक्षेप और दबाव बनाए जाने का आरोप लगाते हुए जिला परिषद के कर्मचारियों ने 23 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है।

__ जनप्रतिनिधियों पर लगाया हस्तक्षेप और दबाव बनाने का आरोप, कार्यालय कर्मियों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने का किया ऐलान
केटी न्यूज/बक्सर :
जिला परिषद कार्यालय में चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। जनप्रतिनिधियों और कार्यालय कर्मचारियों के बीच बढ़ते टकराव ने प्रशासनिक कामकाज को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। सरकारी कार्यों में कथित हस्तक्षेप और दबाव बनाए जाने का आरोप लगाते हुए जिला परिषद के कर्मचारियों ने 23 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। कर्मचारियों के आंदोलन से जिला परिषद की योजनाओं, भुगतान प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक कार्यों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।कार्यालय कर्मियों ने जिला परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों को पत्र भेजकर अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं। पत्र में आरोप लगाया गया है कि कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा निजी हितों को लेकर कार्यालय के कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप किया जा रहा है।

कर्मचारियों का कहना है कि बीते 18 जून से कुछ सदस्यों द्वारा चरणबद्ध धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है, जिसके कारण कार्यालय का सामान्य संचालन प्रभावित हो रहा है।कर्मचारियों ने कुछ लोगों पर अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और सरकारी कार्यों में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि जिला परिषद एक संवैधानिक संस्था है और यहां सभी कार्य सरकार के निर्धारित नियमों व विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित होते हैं। बावजूद इसके योजनाओं की स्वीकृति और भुगतान को लेकर दबाव बनाया जा रहा है।कर्मचारी राहुल कुमार ने बताया कि जिला परिषद में हर वित्तीय निर्णय प्रक्रिया और नियमों के तहत लिया जाता है।

उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक करीब 1 करोड़ 35 लाख 84 हजार रुपये से अधिक की राशि का भुगतान नियमों के अनुरूप किया जा चुका है, जबकि अन्य योजनाओं की प्रक्रिया भी जारी है।कर्मचारियों ने मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी की कार्यप्रणाली और छवि को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को भी गलत बताते हुए इसे बदनाम करने की कोशिश करार दिया है। उनका कहना है कि लगातार दबाव और विवादपूर्ण माहौल में काम करना मुश्किल हो गया है, इसलिए मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।हड़ताल के ऐलान के बाद जिला परिषद कार्यालय में तनाव की स्थिति बनी हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच जारी इस विवाद का समाधान कब तक निकलता है, ताकि प्रभावित हो रहे विकास कार्यों को फिर से गति मिल सके।

