नावानगर में पति से विवाद के बाद पत्नी ने दो बच्चों के साथ खुद भी खाई जहर,दो की मौत

नावानगर में पति से विवाद के बाद पत्नी ने दो बच्चों के साथ खुद भी खाई जहर,दो की मौत

- पत्नी व बेटी की मौत, गंभीर अवस्था में चल रहा है बेटे का इलाज

- सोनवर्षा ओपी थाना क्षेत्र के कड़सर गांव की है घटना

केटी न्यूज/नावानगर

सोनवर्षा ओपी के कड़सर गांव में एक लोमहर्षक घटना सामने आई है। पति से विवाद के बाद एक महिला ने अपने दो बच्चों के साथ खुद भी जहर खा कर आत्महत्या कर ली है। जहर खाने से महिला रीना देवी तथा उसकी एक साल की बेटी की मौत हो गई है। जबकि पांच साल का मासूम बेटा आरा के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान जिंदगी और मौत से लड़ रहा है। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार में कोहराम मच गया है। वही गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।

मृतका गांव के सोनू चौधरी की पत्नी थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने एनएच 319 के किनारे स्थित एक पेड़ के नीचे से महिला का शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल बक्सर भेज दिया है। मिली जानकारी के अनुसार सोमवार की रात पति पत्नी के बीच किसी बात को ले विवाद हुआ था। हालांकि मामला इतना बड़ा नहीं था। विवाद के बाद सोनू अपनी पत्नी तथा बच्चों को घर पर छोड़ रात में खेत की पटवन करने चला गया था। सुबह में जब वह लौटा तो देखा कि आंगन में बच्चें बेसुध पड़े है जबकि पत्नी का कुछ पता नहीं था। थोड़ी देर तक पत्नी की खोजबीन करने के बाद वह बच्चों को इलाज के लिए लेकर आरा चला गया। जहां एक निजी अस्पताल में जाते ही डाक्टरों ने बेटी को मृत घोषित कर दिया, जबकि बेटे की गंभीर अवस्था में इलाज चल रहा है। इधर रीना का शव एनएच पर स्थित ओवर ब्रिज के किनारे एक पेड़ के नीचे पड़ा था। शायद वह जहर खाने के बाद बदहवासी में घर से रोड की तरफ भाग गई थी। वहां गिरते ही उसकी मौत हो गई थी। इसकी सूचना मिलते ही सोनवर्षा ओपी प्रभारी सुनील कुमार ने शव को कब्जे में ले पोस्टमार्टम के लिये सदर अस्पताल बक्सर भेजा। वहीं बच्ची के शव की खोज बिन की जा रही है।

ग्रामीण सूत्रों ने भी बताया कि रात में पति पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था। वही ओपी प्रभारी ने प्रथम दृष्टया इस मामले में कुछ भी बताने से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि अभी तक मामले में किसी के द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं कराया गया है। वही उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। इस घटना की चर्चा पूरे दिन कड़सर तथा आस पास के गांवों में होते रही।