बक्सर में एससी-एसटी मामलों पर सख्ती, 27 स्पीडी ट्रायल लंबित पर प्रशासन नाराज
समाहरणालय परिसर में हुई अहम बैठक में प्रशासन ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार मामलों की धीमी रफ्तार पर कड़ा रुख अपनाया। अपर समाहर्ता अरुण कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं सतर्कता समिति की बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि पीड़ितों को न्याय दिलाने में अब किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
-- अपर समाहर्ता ने दी चेतावनी, गवाही में देरी बर्दाश्त नहीं, सफाई कर्मियों के हक और सुरक्षा पर भी कड़ा रुख
केटी न्यूज/बक्सर
समाहरणालय परिसर में हुई अहम बैठक में प्रशासन ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार मामलों की धीमी रफ्तार पर कड़ा रुख अपनाया। अपर समाहर्ता अरुण कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं सतर्कता समिति की बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि पीड़ितों को न्याय दिलाने में अब किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।बैठक में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत दर्ज मामलों की गहन समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि व्यवहार न्यायालय में 27 मामले स्पीडी ट्रायल के लिए लंबित हैं और निष्पादन की गति अपेक्षाकृत धीमी है।

इस पर अपर समाहर्ता ने खेद जताते हुए विशेष लोक अभियोजक को निर्देश दिया कि अनुसंधान अधिकारी और चिकित्सकों की गवाही समय पर सुनिश्चित कर प्राथमिकता के आधार पर मामलों का निष्पादन कराया जाए।जिला कल्याण पदाधिकारी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अधिनियम के तहत 192 पीड़ितों को कुल 149.32 लाख रुपये की अनुतोष राशि प्रदान की गई है। वहीं वर्ष 2026 में अब तक 24 नए मामले प्राप्त हुए हैं, जिनमें भुगतान की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आरोप पत्र के लिए लंबित मामलों को लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय और जिला कल्याण विभाग आपसी समन्वय के साथ तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि सभी थानाध्यक्ष अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की प्राथमिकी और प्रतिवेदन उसी दिन जिला कल्याण पदाधिकारी को उपलब्ध कराएं, ताकि पीड़ितों को मुआवजा और कानूनी सहायता में देरी न हो।सिर्फ अत्याचार मामलों तक ही चर्चा सीमित नहीं रही। हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सख्त निर्देश दिए गए। नगर परिषद और नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि मलनालियों और सेप्टिक टैंकों की सफाई में सुरक्षा उपकरणों का अनिवार्य उपयोग सुनिश्चित करें तथा मशीनों के प्रयोग का मासिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।

आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मियों के वेतन, ईपीएफ और अन्य सुविधाओं की भी समीक्षा करने का आदेश दिया गया। अपर समाहर्ता ने दो टूक कहा कि सफाई कर्मियों के अधिकारों से समझौता नहीं होगा और यदि किसी प्रकार की समस्या सामने आती है तो उसका त्वरित समाधान किया जाएगा।बैठक ने साफ संकेत दिया कि बक्सर प्रशासन अब न्याय और मानवाधिकार से जुड़े मामलों में सक्रिय और जवाबदेह भूमिका निभाने के मूड में है।

