बासगीत पर्चाधारियों को मिला राजनीतिक संबल, वर्षों से लंबित दखल-जमाबंदी पर उठे सवाल
बक्सर प्रखंड कार्यालय परिसर शनिवार को बासगीत पर्चाधारियों की पीड़ा और प्रशासनिक लापरवाही के सवालों का गवाह बना, जब डुमरांव के पूर्व विधायक डॉ. अजित कुमार सिंह ने अनुसूचित बस्तियों से आए दर्जनों पर्चाधारियों से सीधा संवाद किया। इस दौरान जमीन पर अधिकार के नाम पर वर्षों से चल रही अनदेखी और अव्यवस्था खुलकर सामने आई।
केटी न्यूज/बक्सर
बक्सर प्रखंड कार्यालय परिसर शनिवार को बासगीत पर्चाधारियों की पीड़ा और प्रशासनिक लापरवाही के सवालों का गवाह बना, जब डुमरांव के पूर्व विधायक डॉ. अजित कुमार सिंह ने अनुसूचित बस्तियों से आए दर्जनों पर्चाधारियों से सीधा संवाद किया। इस दौरान जमीन पर अधिकार के नाम पर वर्षों से चल रही अनदेखी और अव्यवस्था खुलकर सामने आई।विभिन्न गांवों से पहुंचे बासगीत पर्चाधारियों ने बताया कि सरकार द्वारा उन्हें आवासीय भूमि का पर्चा तो वर्षों पहले आवंटित कर दिया गया, लेकिन अब तक उन्हें उस भूमि पर वास्तविक दखल नहीं मिल सका है।

कई मामलों में दबंगों द्वारा जमीन पर अवैध कब्जा किए जाने का आरोप लगाया गया, वहीं कुछ लोगों ने जानकारी और मार्गदर्शन के अभाव में अब तक अपनी जमाबंदी नहीं करा पाने की बात कही। परिणामस्वरूप सरकारी अभिलेखों में स्वामित्व होने के बावजूद वे जमीन का उपयोग करने से वंचित हैं।पूर्व विधायक डॉ. अजित कुमार सिंह ने पर्चाधारियों के आवेदन, दस्तावेज और समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने कहा कि बासगीत योजना का मूल उद्देश्य गरीब और वंचित वर्ग को सम्मानजनक जीवन के लिए जमीन और छत उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि वर्षों तक लोग अपने अधिकार से वंचित रहें तो यह योजना की आत्मा के साथ अन्याय है। उन्होंने इसे महज व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की असफलता करार दिया।

डॉ. सिंह ने आश्वासन दिया कि वे सभी मामलों को लेकर संबंधित अंचल और जिला प्रशासन से वार्ता करेंगे तथा जहां जरूरत पड़ी, वहां आंदोलनात्मक रास्ता भी अपनाया जाएगा। उनका कहना था कि पर्चाधारियों को विधिवत दखल दिलाना और लंबित जमाबंदी की प्रक्रिया पूरी कराना उनकी प्राथमिकता होगी।मौके पर उपस्थित समाजसेवी रामजी सिंह ने भी पर्चाधारियों को भरोसा दिलाया कि उनके अधिकारों की लड़ाई में सामाजिक स्तर पर हरसंभव सहयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक गरीब संगठित होकर आवाज नहीं उठाएंगे, तब तक उनके अधिकारों की अनदेखी होती।

