आईआईसी के प्रतिष्ठित साहित्यिक मंच पर गूंजा बक्सर का नाम, रोहित दुबे ने रखे विचार

बक्सर के श्रीकृष्ण नगर कॉलोनी निवासी एवं स्वर्गीय डॉ. बैजनाथ दुबे के पुत्र लेखक रोहित दुबे ने नई दिल्ली के प्रतिष्ठित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सी.डी. देशमुख सभागार में आयोजित वार्षिक साहित्यिक सम्मेलन में लेखक एवं वक्ता के रूप में सहभागिता कर जिले का मान बढ़ाया।

आईआईसी के प्रतिष्ठित साहित्यिक मंच पर गूंजा बक्सर का नाम, रोहित दुबे ने रखे विचार

__ जीवन-मूल्य, युवा शक्ति और व्यक्तित्व विकास पर बेबाकी से रखी बात, राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान

केटी न्यूज/बक्सर।

बक्सर के श्रीकृष्ण नगर कॉलोनी निवासी एवं स्वर्गीय डॉ. बैजनाथ दुबे के पुत्र लेखक रोहित दुबे ने नई दिल्ली के प्रतिष्ठित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सी.डी. देशमुख सभागार में आयोजित वार्षिक साहित्यिक सम्मेलन में लेखक एवं वक्ता के रूप में सहभागिता कर जिले का मान बढ़ाया। राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिष्ठित बौद्धिक मंच पर बक्सर के युवा लेखक की मौजूदगी को जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।सम्मेलन में रोहित दुबे ने जीवन-मूल्य, युवाओं की भूमिका, व्यक्तित्व विकास और जीवन से मिलने वाली व्यावहारिक सीख जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि साहित्य महज किताबों तक सीमित विधा नहीं है, बल्कि यह समाज से संवाद स्थापित करने, सोच को दिशा देने और सकारात्मक बदलाव की राह तैयार करने का सशक्त माध्यम है।

रोहित दुबे की चर्चित पुस्तकें ‘स्कूल में न सिखाए गए 30 महत्वपूर्ण जीवन-पाठ’ और ‘मेरे बेटे के नाम पत्र’ जीवन के उन जरूरी पहलुओं पर केंद्रित हैं, जिन्हें पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाता। जबकि व्यक्तिगत जीवन, कार्यक्षेत्र और सामाजिक व्यवहार में इनका महत्व बेहद व्यापक है।लेखन के साथ रोहित दुबे युवाओं के बीच जीवन-कौशल, संवाद-कौशल, रोजगार एवं करियर मार्गदर्शन, व्यक्तित्व विकास और सार्वजनिक वक्तृत्व के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनका उद्देश्य युवाओं को केवल किताबी शिक्षा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें जीवन की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर देश के प्रमुख सांस्कृतिक और बौद्धिक संस्थानों में शामिल है। यहां साहित्य, कला, संस्कृति और समसामयिक विषयों पर देश-विदेश के लेखक, चिंतक और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियां विचार-विमर्श करती हैं। ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर रोहित दुबे की सहभागिता ने बक्सर को राष्ट्रीय साहित्यिक परिदृश्य में पहचान दिलाई है।रोहित दुबे ने कहा कि व्यक्ति की शुरुआत भले ही छोटे शहर से हो, लेकिन विचारों की व्यापकता, निरंतर प्रयास और सीखने की ललक उसे राष्ट्रीय मंच तक पहुंचा सकती है। उनकी उपलब्धि बक्सर के उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो छोटे शहर से निकलकर देश स्तर पर अपनी पहचान बनाने का सपना देखते हैं।