पेपरलेस रजिस्ट्री ने थामी डुमरांव में जमीन की खरीद-बिक्री की रफ्तार
पेपरलेस निबंधन व्यवस्था लागू होने के बाद डुमरांव अवर निबंधन कार्यालय में जमीन-मकान की रजिस्ट्री की रफ्तार अचानक बेहद धीमी हो गई है। स्थिति यह है कि 3 अगस्त से अब तक नौ दिनों में महज दो दस्तावेजों का निबंधन हो सका है। इनमें एक मॉर्गेज और एक मैरिज रजिस्ट्री शामिल है। जबकि सामान्य दिनों में इसी कार्यालय में प्रतिदिन करीब 60 से 90 रजिस्ट्री होती रही हैं।

__ 9 दिनों में महज दो दस्तावेज निबंधित, रोजाना 60-90 रजिस्ट्री वाले कार्यालय में पसरा सन्नाटा; तकनीकी खामियों और डिजिटल प्रक्रिया को लेकर कातिबों में नाराजगी
केटी न्यूज/डुमरांव।
पेपरलेस निबंधन व्यवस्था लागू होने के बाद डुमरांव अवर निबंधन कार्यालय में जमीन-मकान की रजिस्ट्री की रफ्तार अचानक बेहद धीमी हो गई है। स्थिति यह है कि 3 अगस्त से अब तक नौ दिनों में महज दो दस्तावेजों का निबंधन हो सका है। इनमें एक मॉर्गेज और एक मैरिज रजिस्ट्री शामिल है। जबकि सामान्य दिनों में इसी कार्यालय में प्रतिदिन करीब 60 से 90 रजिस्ट्री होती रही हैं। नई व्यवस्था के बाद कामकाज में आई इस भारी गिरावट ने व्यवस्था की तैयारियों और तकनीकी क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।मंगलवार को कातिबों ने निबंधन कार्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन कर पेपरलेस व्यवस्था को तत्काल स्थगित करने की मांग की। कातिबों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य भले ही पारदर्शिता और सहूलियत बढ़ाना है, लेकिन तकनीकी अड़चनों के कारण फिलहाल आम लोगों के लिए परेशानी बढ़ गई है।

कातिबों के मुताबिक सर्वर डाउन रहने, वेबसाइट की धीमी गति और सॉफ्टवेयर में तकनीकी गड़बड़ी के कारण दस्तावेज तैयार करने से लेकर निबंधन तक की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए डिजिटल प्रक्रिया और भी चुनौतीपूर्ण है। उनका दावा है कि बड़ी संख्या में लोग अंग्रेजी भाषा और ऑनलाइन प्रक्रिया से सहज नहीं हैं, जबकि नई व्यवस्था में दस्तावेजी प्रक्रिया अंग्रेजी आधारित है।कातिबों ने पारंपरिक दस्तावेजों में होने वाले हस्ताक्षर, गवाहों की पुष्टि और अन्य सुरक्षा प्रक्रियाओं को लेकर भी चिंता जताई। उनका सवाल है कि केवल मोबाइल पर आए ओटीपी के आधार पर निबंधन पूरा होने की स्थिति में पक्षकारों की सहमति और पहचान की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित होगी। साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के बीच कई उपभोक्ता भी ओटीपी साझा करने को लेकर आशंकित हैं।

रब्बान आलम समेत कातिबों ने कहा कि व्यवस्था को लागू करने से पहले पर्याप्त तकनीकी तैयारी, स्थानीय भाषा में सुविधा और लोगों को प्रशिक्षण देना जरूरी था। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि पेपरलेस निबंधन भविष्य की जरूरत है, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए मजबूत सर्वर, सरल डिजिटल इंटरफेस और पारंपरिक सुरक्षा उपायों का डिजिटल विकल्प जरूरी है। डुमरांव में ठप जैसी स्थिति बता रही है कि तकनीक लागू करने के साथ उसके लिए जमीनी तैयारी भी उतनी ही जरूरी है।

