थाने में ‘गुपचुप’ कैद पर कोर्ट का प्रहार, नियम तोड़ने पर दो पुलिस अफसरों को तलब

पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए पॉक्सो कोर्ट ने ब्रह्मपुर थाना कांड संख्या 123/2026 में बड़ा हस्तक्षेप किया है। अदालत ने कथित अवैध हिरासत को गंभीर मानते हुए दो आरोपियों—अलीम हाशमी और तबिस अली—को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया और पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज कर दी। दोनों को 5-5 हजार रुपये के निजी मुचलके पर छोड़ा गया।

थाने में ‘गुपचुप’ कैद पर कोर्ट का प्रहार, नियम तोड़ने पर दो पुलिस अफसरों को तलब

केटी न्यूज/बक्सर

पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए पॉक्सो कोर्ट ने ब्रह्मपुर थाना कांड संख्या 123/2026 में बड़ा हस्तक्षेप किया है। अदालत ने कथित अवैध हिरासत को गंभीर मानते हुए दो आरोपियों—अलीम हाशमी और तबिस अली—को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया और पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज कर दी। दोनों को 5-5 हजार रुपये के निजी मुचलके पर छोड़ा गया।विशेष न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा ने सुनवाई के दौरान पाया कि आरोपियों को 26 अप्रैल से ही थाने में रखा गया था, जबकि गिरफ्तारी 28 अप्रैल को दर्शाई गई। अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया अवैध हिरासत मानते हुए कड़ी नाराजगी जताई।

कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले में लगाए गए आरोप सात वर्ष से अधिक सजा वाले नहीं हैं, इसके बावजूद गिरफ्तारी में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया।जांच की स्थिति पर भी अदालत ने सवाल उठाए। पीड़िता का बयान अब तक दर्ज नहीं किया गया है और शिकायत में उल्लेखित मोबाइल संदेशों के स्क्रीनशॉट भी केस डायरी में नहीं हैं। उपलब्ध साक्ष्य अपर्याप्त पाए जाने पर कोर्ट ने रिमांड को अनुचित ठहराया।मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने ब्रह्मपुर थाना प्रभारी ब्रजेश कुमार और जांच पदाधिकारी विनोद कुमार यादव से तीन दिन के भीतर व्यक्तिगत स्पष्टीकरण मांगा है।

उनसे पूछा गया है कि गिरफ्तारी की वास्तविक तारीख क्यों छिपाई गई और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन क्यों किया गया। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि अवैध हिरासत के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।अदालत ने दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक और एसपी को भेजते हुए विभागीय जांच कराने की भी बात कही गई है। मामले में अगली सुनवाई 14 मई 2026 को होगी।