किसान के बेटे ने रचा इतिहास: बक्सर के संदीप ठाकुर को गणित में पीएचडी

बक्सर जिले के गंगौली गांव के रहने वाले शत्रुघ्न कुमार ठाकुर उर्फ़ संदीप ठाकुर ने विपरीत परिस्थितियों के बीच गणित में पीएचडी की उपाधि हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा से उन्होंने यह डिग्री प्रो. डॉ. आलोक कुमार के निर्देशन में पूरी की। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शैलेन्द्र कुमार चतुर्वेदी ने उन्हें उपाधि प्रदान करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

किसान के बेटे ने रचा इतिहास: बक्सर के संदीप ठाकुर को गणित में पीएचडी

__ परिवार की चुनौतियों, राजनीति की व्यस्तता और संघर्ष के बीच हासिल की बड़ी सफलता, ऑपरेशंस रिसर्च में किया महत्वपूर्ण शोध

केटी न्यूज/बक्सर:

बक्सर जिले के गंगौली गांव के रहने वाले शत्रुघ्न कुमार ठाकुर उर्फ़ संदीप ठाकुर ने विपरीत परिस्थितियों के बीच गणित में पीएचडी की उपाधि हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा से उन्होंने यह डिग्री प्रो. डॉ. आलोक कुमार के निर्देशन में पूरी की। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शैलेन्द्र कुमार चतुर्वेदी ने उन्हें उपाधि प्रदान करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।डॉ. संदीप ठाकुर का शोध ‘परिवहन समस्याओं के लिए उत्तम गणितीय मॉडलों का अध्ययन’ पर आधारित है, जो ऑपरेशंस रिसर्च के क्षेत्र में बेहद उपयोगी माना जा रहा है। यह शोध संसाधनों के बेहतर आवंटन, लागत में कमी, समय की बचत और लॉजिस्टिक्स को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़ा है।

वर्तमान समय में सड़क, रेल, वायु परिवहन और सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में ऐसे मॉडल काफी कारगर साबित हो रहे हैं।इस उपलब्धि की खास बात यह है कि संदीप ठाकुर एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता महेश ठाकुर खेती-किसानी से जुड़े हैं, जबकि उनकी माता सुशीला देवी लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों और कठिन हालात के बावजूद संदीप ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। दिन में सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहने के बाद वे रात में शोध कार्य में जुटे रहते थे।संदीप ठाकुर छात्र जीवन से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं।

उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और युवा अधिकारों से जुड़े कई आंदोलनों का नेतृत्व किया है। वर्तमान में वे जदयू युवा प्रदेश महासचिव के पद पर रहते हुए युवाओं और किसानों के मुद्दों पर काम कर रहे हैं। राजनीति की व्यस्तता के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को कभी नहीं छोड़ा, जो उनकी लगन और अनुशासन को दर्शाता है।डॉ. संदीप ठाकुर की सफलता न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे बक्सर और बिहार के लिए गर्व की बात है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। अब वे शोध, शिक्षण और सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज में अपना योगदान जारी रखने की तैयारी में हैं।