ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपियों के संरक्षण व डिजिटलीकरण पर जोर

प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल “ज्ञान भारतम मिशन” के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शनिवार को महत्वपूर्ण पहल की गई। जिलाधिकारी साहिला की अध्यक्षता में सीताराम उपाध्याय संग्रहालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मिशन से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई और इसके सफल संचालन के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपियों के संरक्षण व डिजिटलीकरण पर जोर

__ डीएम साहिला की अध्यक्षता में प्रेस कॉन्फ्रेंस, संस्थाओं व व्यक्तियों से पांडुलिपियों की पहचान व अपलोड सुनिश्चित करने का निर्देश

केटी न्यूज/बक्सर

प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल “ज्ञान भारतम मिशन” के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शनिवार को महत्वपूर्ण पहल की गई। जिलाधिकारी साहिला की अध्यक्षता में सीताराम उपाध्याय संग्रहालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मिशन से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई और इसके सफल संचालन के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ने कहा कि जिले के अंतर्गत आने वाली सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं—जैसे मठ, मंदिर, शैक्षणिक संस्थान, निजी संगठन, पुस्तकालय आदि—के साथ-साथ उन व्यक्तियों की पहचान की जाए, जिनके पास प्राचीन पांडुलिपियों का संग्रह उपलब्ध है।

इन सभी की सूची तैयार कर नियमित रूप से साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी, ताकि कार्य में पारदर्शिता और गति बनी रहे।प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि पांडुलिपि से आशय उन हस्तलिखित ग्रंथों या पुस्तकों से है, जो कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र, कपड़ा या धातु जैसे माध्यमों पर लिखे गए हों और जिनकी आयु कम से कम 75 वर्ष हो। ऐसे दुर्लभ दस्तावेज भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है।सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ें और पांडुलिपियों के सर्वेक्षण के लिए उन्हें प्रेरित करें। इसके लिए जागरूक नागरिकों एवं संबंधित संस्थाओं के साथ बैठक आयोजित कर उन्हें मिशन के उद्देश्यों से अवगत कराया जाए।

साथ ही, जिनके पास पांडुलिपियां सुरक्षित हैं, उन्हें “ज्ञान भारतम मोबाइल एप” के माध्यम से उनका विवरण अपलोड कराने के लिए प्रेरित किया जाए।जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि प्रत्येक प्रखंड में दो-दो पांडुलिपि सर्वेक्षकों की नियुक्ति की जाए। ये सर्वेक्षक संबंधित संस्थाओं एवं व्यक्तियों से संपर्क कर उनके पास उपलब्ध पांडुलिपियों का विवरण एकत्र करेंगे और उन्हें मोबाइल एप पर अपलोड करेंगे। साथ ही, वे अपने कार्यों की साप्ताहिक रिपोर्ट भी संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराएंगे।अनुमंडल एवं प्रखंड स्तर पर तैयार की जाने वाली सूची में संस्था या व्यक्ति का नाम, संस्था के प्रभारी का नाम, ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर, पांडुलिपियों की अनुमानित संख्या और उनकी अवधि का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य किया गया है।

इसके अलावा, प्रत्येक केंद्र और व्यक्ति के पास उपलब्ध पांडुलिपियों की विस्तृत सूची भी संकलित की जाएगी।जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि “ज्ञान भारतम मिशन” के तहत पांडुलिपियां उनके मूल संग्रहकर्ता संस्था या व्यक्ति के पास ही सुरक्षित रहेंगी। सरकार का उद्देश्य केवल इन धरोहरों का संरक्षण और डिजिटलीकरण करना है, ताकि उनमें निहित ज्ञान को अनुसंधान, अनुवाद और प्रकाशन के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया जा सके।उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।