रामपुर में मनरेगा योजना में फर्जी हाजिरी का खुलासा, विभागीय पोर्टल पर फोटो अपलोड में गड़बड़ी का आरोप
प्रखंड क्षेत्र में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत फर्जी उपस्थिति दर्ज करने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार एक के बाद एक योजनाओं में अनियमितता सामने आ रही है। ताजा मामला प्रखंड के रामपुर गांव स्थित ग्राम पंचायत रामपुर से अनुमोदित एक योजना से जुड़ा हुआ है, जहां मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगा है।मामला ग्राम पंचायत रामपुर के ग्राम कुलमनपुर में छोटकी मोरी से कुलमनपुर पइन तक कराहा खुदाई कार्य से संबंधित है।
केटी न्यूज/केसठ।
प्रखंड क्षेत्र में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत फर्जी उपस्थिति दर्ज करने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार एक के बाद एक योजनाओं में अनियमितता सामने आ रही है। ताजा मामला प्रखंड के रामपुर गांव स्थित ग्राम पंचायत रामपुर से अनुमोदित एक योजना से जुड़ा हुआ है, जहां मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगा है।मामला ग्राम पंचायत रामपुर के ग्राम कुलमनपुर में छोटकी मोरी से कुलमनपुर पइन तक कराहा खुदाई कार्य से संबंधित है।

इस योजना का वर्क कोड 20611339 है। योजना के तहत कुल चार मास्टर रोल निकाले गए हैं, जिनमें 38 जॉब कार्डधारी मजदूरों को कार्य के लिए चयनित किया गया है। जानकारी के अनुसार मास्टर रोल संख्या 2212 में कुल 10 मजदूरों का चयन किया गया था, जिसमें 7 पुरुष और 3 महिला मजदूर शामिल हैं। लेकिन विभागीय पोर्टल पर अपलोड की गई उपस्थिति और तस्वीरों में भारी विसंगति पाई गई है। पोर्टल पर मास्टर रोल संख्या 2212 में 3 महिलाओं के स्थान पर 4 महिलाओं और 7 पुरुषों के स्थान पर 6 पुरुषों की फोटो अपलोड की गई है।

हैरानी की बात यह है कि भौतिक मास्टर रोल में स्पष्ट रूप से 7 पुरुष और 3 महिला मजदूरों की ही उपस्थिति दर्ज है, जबकि ऑनलाइन पोर्टल पर एक पुरुष मजदूर के स्थान पर महिला मजदूर की तस्वीर लगाकर फर्जी उपस्थिति दर्शाई गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि उपस्थिति दर्ज करने और फोटो अपलोड करने की प्रक्रिया में जानबूझकर हेराफेरी की गई है।प्रखंड क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से मनरेगा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की आड़ में मनरेगा कर्मी आपसी मिलीभगत से इस तरह की गड़बड़ियों को अंजाम दे रहे हैं। हालांकि अब तक इस मामले में किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। स्थानीय लोगों और जागरूक ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके और मजदूरों के हक के साथ हो रही लूट पर रोक लगाई जा सके। यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना की विश्वसनीयता पर गहरा असर पड़ सकता है।

--पत्रकार को बनाया जा रहा है निशाना:
प्रखंड क्षेत्र से लगातार मनरेगा में फर्जी उपस्थिति खबर प्रकाशित होने के बाद संबंधित मामले को लेकर अब पत्रकार को ही निशाना बनाया जा रहा है। खबर को मैनेज करने के उद्देश्य से लगातार फोन कॉल किए जा रहे हैं, ताकि मामला दबाया जा सके। इस तरह का दबाव न सिर्फ स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला है, बल्कि सच्चाई सामने लाने वालों को डराने की कोशिश भी मानी जा रही है।
