आरजी बकाया, रोजगार और प्रदूषण पर भड़के चौसा के किसान
बक्सर थर्मल पावर प्लांट परियोजना से जुड़े वर्षों पुराने वादों के पूरा न होने से आक्रोशित किसानों और बेरोजगार युवकों ने मंगलवार को खुलकर मोर्चा खोल दिया। परियोजना प्रभावित परिवारों को आरजी भुगतान, फसल वार्षिकी और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग को लेकर मोहनपुरवा स्थित बक्सर थर्मल पावर प्लांट के मुख्य गेट पर एक दिवसीय सांकेतिक लेकिन बेहद सख्त तेवरों वाला महाधरना आयोजित किया गया।
-- थर्मल पावर प्लांट के गेट पर शक्ति प्रदर्शन, 20 मार्च से अनिश्चितकालीन कार्य ठप करने का ऐलान
केटी न्यूज/चौसा
बक्सर थर्मल पावर प्लांट परियोजना से जुड़े वर्षों पुराने वादों के पूरा न होने से आक्रोशित किसानों और बेरोजगार युवकों ने मंगलवार को खुलकर मोर्चा खोल दिया। परियोजना प्रभावित परिवारों को आरजी भुगतान, फसल वार्षिकी और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग को लेकर मोहनपुरवा स्थित बक्सर थर्मल पावर प्लांट के मुख्य गेट पर एक दिवसीय सांकेतिक लेकिन बेहद सख्त तेवरों वाला महाधरना आयोजित किया गया।संयुक्त किसान मोर्चा बिहार, भारतीय किसान यूनियन तथा प्रभावित किसान खेतिहर मजदूर मोर्चा चौसा के संयुक्त नेतृत्व में आयोजित इस धरना-प्रदर्शन ने साफ संकेत दे दिया कि अब किसान सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहते हैं।धरना स्थल पर बड़ी संख्या में किसान, खेतिहर मजदूर और बेरोजगार युवक मौजूद रहे, जिससे प्लांट प्रबंधन पर दबाव स्पष्ट रूप से नजर आया।

धरने को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि वर्ष 2016 में ही परियोजना प्रभावितों को 5 लाख रुपये की एकमुश्त आरजी राशि और 750 दिन की मजदूरी के बराबर भुगतान किया जाना था, लेकिन लगभग एक दशक बीत जाने के बाद भी यह भुगतान अधूरा है। आरोप लगाया गया कि वर्तमान में कंपनी प्रबंधन नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से आरजी भुगतान कर रहा है, जिससे प्रभावित परिवारों में भारी असंतोष है।नेताओं ने यह भी कहा कि वर्ष 2019-20 से स्थानीय बेरोजगार युवक लगातार बायोडाटा जमा कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद रोजगार में बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।इससे न सिर्फ स्थानीय युवाओं का हक मारा जा रहा है, बल्कि परियोजना के प्रति विश्वास भी लगातार कमजोर हो रहा है। धरना स्थल पर मौजूद युवाओं ने कंपनी प्रबंधन पर रोजगार नीति में भेदभाव का सीधा आरोप लगाया।

प्रदर्शन के दौरान कोयला डंपिंग यार्ड से फैल रहे प्रदूषण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। नेताओं ने कहा कि खिलाफतपुर, नारायणपुर, अखौरीपुर गोला, कनकनारायणपुर, बनारपुर और सिकरौल सहित कई गांव कोयला धूल और प्रदूषण की चपेट में हैं। इससे फसल, पशुधन और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है, लेकिन कंपनी इस ओर आंख मूंदे बैठी है।किसान संगठनों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 20 मार्च से एसटीपीएल थर्मल पावर प्लांट का कार्य अनिश्चितकालीन रूप से शांतिपूर्ण तरीके से बंद कर दिया जाएगा।नेताओं ने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह अहिंसक होगा, लेकिन इसके लिए कंपनी प्रबंधन और प्रशासन जिम्मेदार होंगे।महाधरना की अध्यक्षता वरिष्ठ किसान नेता ललितेश्वर राय ने की, जबकि मंच संचालन नंद कुमार राम ने किया।

धरने में भारतीय किसान यूनियन बिहार-झारखंड प्रदेश अध्यक्ष दिनेश कुमार, बिहार राज्य दुग्ध उत्पादक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह, पूर्व जिला परिषद सदस्य बसंती देवी, बनारपुर की मुखिया ममता देवी सहित उपेंद्र राय, नंदलाल सिंह, घनश्याम चौधरी, बृजेश राय, इस्राइल खान, रामप्रवेश सिंह यादव समेत बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान और मजदूर मौजूद रहे।धरने के दौरान वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि अब संघर्ष आर-पार का होगा। वर्षों से लंबित मांगों को लेकर किसान अब पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी।

