केटी न्यूज/बक्सर
विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान, बक्सर में रह रही एक बालिका को जिलाधिकारी साहिला द्वारा बेंगलुरु के एक दंपत्ति को पूर्व पालन-पोषण एवं देखरेख के लिए सौंपा गया। बच्ची को पाकर दंपत्ति भावुक हो उठे और उन्होंने प्रशासन के प्रति आभार जताया।जिलाधिकारी ने बताया कि दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं विधिसम्मत तरीके से पूरी की जाती है। गोद लेने के इच्छुक अभिभावकों को केंद्रीय दत्तक संसाधन प्राधिकरण के पोर्टल पर पंजीकरण करना होता है। इसके लिए आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट अथवा जन्म प्रमाण पत्र में से किसी एक दस्तावेज के साथ आवेदन करना अनिवार्य है।

पंजीकरण के बाद 30 दिनों के भीतर आवश्यक कागजात पोर्टल पर अपलोड करना होता है।इसके बाद अभिभावकों का गृह अध्ययन किया जाता है, जिसमें उनकी शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्थिति, आर्थिक क्षमता और दत्तक ग्रहण की इच्छा का मूल्यांकन किया जाता है। प्रतीक्षा सूची, बच्चों का मिलान, आरक्षण, स्वीकृति एवं न्यायालय में याचिका दाखिल करने जैसी सभी प्रक्रियाएं क्रमवार पूरी की जाती हैं।नियमों के अनुसार, विवाहित दंपत्ति के लिए कम से कम दो वर्षों का स्थिर वैवाहिक संबंध होना आवश्यक है और दोनों की सहमति जरूरी है।

एकल पुरुष केवल बालक को गोद ले सकता है, जबकि एकल महिला बालक और बालिका दोनों को गोद ले सकती है। जिन दंपत्तियों के पहले से दो संतान हैं, वे सामान्य बच्चों को गोद लेने के पात्र नहीं होते, बल्कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को ही अपना सकते हैं।प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी अन्य माध्यम से बच्चा गोद लेना या देना पूरी तरह अवैध है।इस अवसर पर जिला बाल संरक्षण इकाई के पदाधिकारी, बाल संरक्षण अधिकारी एवं संस्थान के समन्वयक उपस्थित रहे।





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