संत जान सेकेंड्री स्कूल में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम

भारतवर्ष की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा में पर्व-त्योहारों का विशेष महत्व है। इसी कड़ी में गुरुवार को डुमराँव स्थित संत जान सेकेंड्री स्कूल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास और भक्तिमय माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं लीलाओं पर आधारित विभिन्न आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गईं।

संत जान सेकेंड्री स्कूल में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम

__ कृष्ण के बाल रूप से लेकर रासलीला और कंस वध तक की झांकियों ने मोहा मन, बच्चों ने प्रस्तुत की आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुति

केटी न्यूज/डुमराँव

 भारतवर्ष की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा में पर्व-त्योहारों का विशेष महत्व है। इसी कड़ी में गुरुवार को डुमराँव स्थित संत जान सेकेंड्री स्कूल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास और भक्तिमय माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं लीलाओं पर आधारित विभिन्न आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गईं। कार्यक्रम में बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया।कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, गोपियों के साथ रासलीला तथा उनके जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। बाल कलाकारों ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर मंचन कर उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया। रासलीला की प्रस्तुति के दौरान बच्चों की कलात्मकता और अभिनय ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

जन्माष्टमी समारोह में कंस मामा की झांकी भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसमें कंस के अहंकार, अत्याचार और घमंड को दर्शाते हुए उसके अंत का संदेश दिया गया। झांकी के माध्यम से बच्चों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि अहंकार और अत्याचार चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है। अंततः सत्य, न्याय और सद्भाव की ही विजय होती है।कंस के आतंक के अंत और भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से बच्चों ने समाज में शांति, समरसता और पारदर्शिता स्थापित करने का संदेश भी दिया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय का वातावरण पूरी तरह उत्सवमय बना रहा। छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा में अपनी प्रस्तुतियां देकर भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की सुंदर झलक पेश की।

पूरे कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय के निदेशक रमेश सिंह की देखरेख में किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मियों की भूमिका भी सराहनीय रही। उन्होंने बच्चों को तैयार कराने से लेकर मंचन की व्यवस्थाओं तक में महत्वपूर्ण योगदान दिया।समापन अवसर पर विद्यालय के निदेशक रमेश सिंह ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी शिक्षकों, कर्मियों और छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों को अपनी परंपरा, संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इसके बाद सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।