डुमरांव नगर परिषद में बड़े पैमाने पर अनियमितता उजागर, अधिकारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा

डुमरांव अनुमंडल में नगर परिषद के कार्यों में गंभीर अनियमितता की पुष्टि होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी मनीषा कुमारी ने मामले की जांच के बाद तत्कालीन कनीय अभियंता अंजनी कुमार और तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की है।

डुमरांव नगर परिषद में बड़े पैमाने पर अनियमितता उजागर, अधिकारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा

__ बिना निविदा 3 किमी पीसीसी सड़क निर्माण, गुणवत्ता पर सवाल, आर्थिक अपराध इकाई भी जांच में जुटी

केटी न्यूज/डुमरांव 

डुमरांव अनुमंडल में नगर परिषद के कार्यों में गंभीर अनियमितता की पुष्टि होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी मनीषा कुमारी ने मामले की जांच के बाद तत्कालीन कनीय अभियंता अंजनी कुमार और तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की है। यह मामला 14 फरवरी को स्थानीय निवासी नीलकांत धीरज द्वारा दर्ज कराए गए परिवाद से जुड़ा है। परिवादी द्वारा दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नगर परिषद द्वारा नगर विकास एवं आवास विभाग के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए कई योजनाओं को मनमाने तरीके से क्रियान्वित किया गया।

जांच के दौरान यह आरोप सत्य पाया गया। विशेष रूप से वार्ड संख्या 12 में लगभग 3 किलोमीटर लंबी पीसीसी सड़क का निर्माण बिना विधिवत निविदा प्रक्रिया अपनाए कराया गया, जो विभागीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।जांच में यह भी सामने आया कि सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता अत्यंत खराब है। संलग्न छायाचित्रों के अवलोकन में सड़क पर बड़े-बड़े दरारें पाई गईं, जो निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग की ओर इशारा करती हैं। इतना ही नहीं, सड़क का निर्माण ट्रांसमिशन लाइन के पोल के नीचे और उसके बीच से कराया गया है, जिससे उस मार्ग पर सुरक्षित आवागमन लगभग असंभव हो गया है। यह न केवल तकनीकी लापरवाही है बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है।

लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि इस निर्माण कार्य में सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ है और संबंधित अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों की अवहेलना की है। इसके आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) भी सक्रिय हो गई है। नीलकांत धीरज द्वारा नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को दी गई शिकायत पर संज्ञान लेते हुए ईओयू के पुलिस अधीक्षक ने बक्सर जिलाधिकारी को पत्र लिखकर जांच का निर्देश दिया है। पत्र संख्या 2396 में यह उल्लेख किया गया है कि तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार पर एक ही योजना को अलग-अलग संख्या देकर संचिका खोलने और अवैध रूप से भुगतान कराने का आरोप है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि विभागीय नियमों की अनदेखी करते हुए बिना निविदा प्रक्रिया के कार्य कराए गए, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा है। यह मामला वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का संकेत देता है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।जिलाधिकारी साहिला ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम डुमरांव राकेश कुमार को विस्तृत जांच का निर्देश दिया है। एसडीएम ने आगे कार्रवाई करते हुए वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी राहुल धर दुबे को आर्थिक अपराध इकाई और परिवादी द्वारा दिए गए सभी दस्तावेजों की जांच करने का आदेश दिया है।

गौरतलब है कि नगर परिषद क्षेत्र में पीसीसी सड़क निर्माण को लेकर पहले भी कई बार अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं। इस ताजा मामले ने एक बार फिर नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की बर्बादी होती रहेगी। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।