बक्सर स्टेशन पर बंदरों का कब्जा, यात्री बेहाल; प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
बक्सर रेलवे स्टेशन पर इन दिनों बंदरों का बढ़ता आतंक रेल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। प्रतिदिन हजारों यात्रियों की आवाजाही वाले इस प्रमुख रेलवे स्टेशन पर बंदरों के झुंड खुलेआम यात्रियों के बीच पहुंचकर खाने-पीने का सामान, पानी की बोतल, बैग और अन्य वस्तुएं छीन रहे हैं, लेकिन समस्या के समाधान को लेकर अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।

__ सामान छीनने, यात्रियों पर झपट्टा मारने की घटनाएं बढ़ीं, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल; वन विभाग की मदद से कार्रवाई की मांग तेज
केटी न्यूज/बक्सर
बक्सर रेलवे स्टेशन पर इन दिनों बंदरों का बढ़ता आतंक रेल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। प्रतिदिन हजारों यात्रियों की आवाजाही वाले इस प्रमुख रेलवे स्टेशन पर बंदरों के झुंड खुलेआम यात्रियों के बीच पहुंचकर खाने-पीने का सामान, पानी की बोतल, बैग और अन्य वस्तुएं छीन रहे हैं, लेकिन समस्या के समाधान को लेकर अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। इससे यात्रियों में नाराजगी के साथ-साथ असुरक्षा की भावना भी बढ़ती जा रही है।यात्रियों का कहना है कि स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज और प्रतीक्षालय के आसपास बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई बार बंदर अचानक यात्रियों पर झपट्टा मार देते हैं, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन जाती है।

महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों को अपने सामान की सुरक्षा के लिए लगातार सतर्क रहना पड़ता है।स्थानीय यात्री राजेश कुमार ने बताया कि स्टेशन पर यदि किसी के हाथ में खाने की कोई वस्तु दिख जाए तो बंदर तुरंत उसे छीनने का प्रयास करते हैं। कई बार बच्चे बंदरों की हरकतों से डरकर रोने लगते हैं और अभिभावकों को उन्हें संभालने में मुश्किल होती है। यात्रियों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो किसी दिन बड़ा हादसा भी हो सकता है।स्थानीय लोगों के अनुसार स्टेशन परिसर में फैला कचरा और खुले में पड़े खाद्य पदार्थ बंदरों को आकर्षित कर रहे हैं।

जानकारों का मानना है कि भोजन की उपलब्धता के कारण बंदरों की गतिविधियां बढ़ रही हैं और वे अधिक आक्रामक होते जा रहे हैं। इसके बावजूद समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है।यात्रियों ने रेल प्रशासन से मांग की है कि वन विभाग के सहयोग से बंदरों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की व्यवस्था की जाए। साथ ही स्टेशन परिसर में चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन को दुरुस्त किया जाए तथा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए। यात्रियों का कहना है कि रेलवे को इस समस्या को सामान्य घटना मानने के बजाय सुरक्षा के गंभीर मुद्दे के रूप में लेना चाहिए।

