डुमरांव के ऐतिहासिक पुस्तकालय में सहेजी जाएंगी विरासत की धरोहरें
डुमरांव की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना "ज्ञान भारतम मिशन" के तहत जिलाधिकारी साहिला ने नगर के राजगढ़ स्थित गांधी साहित्य परिषद पुस्तकालय का निरीक्षण किया और वहां संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों तथा प्राचीन दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करने की आवश्यकता बताई।

__ डीएम साहिला ने गांधी साहित्य परिषद व राजगढ़ परिसर का किया निरीक्षण, दुर्लभ पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन पर दिया जोर
केटी न्यूज/डुमरांव
डुमरांव की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना "ज्ञान भारतम मिशन" के तहत जिलाधिकारी साहिला ने नगर के राजगढ़ स्थित गांधी साहित्य परिषद पुस्तकालय का निरीक्षण किया और वहां संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों तथा प्राचीन दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करने की आवश्यकता बताई।निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पुस्तकालय में रखी लगभग सौ वर्ष पुरानी पुस्तकों, हस्तलिखित पांडुलिपियों और ऐतिहासिक अभिलेखों का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की धरोहरें केवल स्थानीय इतिहास ही नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य संपत्ति हैं। इनके संरक्षण और डिजिटाइजेशन से आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा।

डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि नामित सर्वेयरों के साथ समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक लोगों को "ज्ञान भारतम मिशन" एप के माध्यम से पांडुलिपियों के संरक्षण अभियान से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अनेक परिवारों तथा संस्थानों के पास पुराने ग्रंथ, पत्र, दस्तावेज और हस्तलिखित सामग्री मौजूद हैं, जिन्हें समय रहते सुरक्षित करना जरूरी है।ज्ञात हो कि प्रत्येक प्रखंड में दो-दो पांडुलिपि सर्वेयर नियुक्त किए गए हैं। डुमरांव प्रखंड में समाजसेवी राजीव रंजन सिंह और शिक्षक पूर्णानंद मिश्रा को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।निरीक्षण के क्रम में सर्वेयर राजीव रंजन सिंह ने डुमरांव राज परिवार की ओर से उपलब्ध कराए गए प्रथम विश्व युद्ध काल में महाराज सर केशव प्रसाद को प्राप्त प्रशस्ति पत्र की जानकारी दी, जिसे स्वीकृति के बाद मिशन एप पर अपलोड किया गया है।

वहीं सर्वेयर पूर्णानंद मिश्रा ने वर्षों पुराने हस्तलिखित मंत्रों का संग्रह जिलाधिकारी को दिखाया। जिलाधिकारी ने इसे विशेष महत्व का बताते हुए सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे दस्तावेज भारतीय परंपरा, धार्मिक आस्था और सामाजिक इतिहास के महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं।पुस्तकालय निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने राजगढ़ परिसर स्थित करीब 350 वर्ष पुराने हनुमान मंदिर तथा वर्ष 1824 में निर्मित बांके बिहारी मंदिर का भी भ्रमण किया। उन्होंने मंदिरों की स्थापत्य कला, संरचना और धार्मिक महत्व की जानकारी ली तथा पूजा-अर्चना भी की।इस अवसर पर डुमरांव राज परिवार के महाराज शिवांग विजय सिंह, महाराज कुमार मानविजय सिंह, महाराज कुमार सुमेर विजय सिंह, अनुमंडलाधिकारी राकेश कुमार, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी विनीत कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी संदीप पांडेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

