पीएचईडी से नप को मिली शहर की जलापूर्ति व्यवस्था, अब नगर परिषद संभालेगा कमान

शहर की बदहाल पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी अब पूरी तरह नगर परिषद के कंधों पर आ गई है। लंबे समय से पेयजल संकट और शिकायतों के लिए भटक रहे नगरवासियों को अब पीएचईडी कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। पेयजल आपूर्ति से जुड़े सभी कार्यों को पीएचईडी विभाग ने नगर परिषद को हस्तांतरित कर दिया है।

पीएचईडी से नप को मिली शहर की जलापूर्ति व्यवस्था, अब नगर परिषद संभालेगा कमान

केटी न्यूज/डुमरांव।

शहर की बदहाल पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी अब पूरी तरह नगर परिषद के कंधों पर आ गई है। लंबे समय से पेयजल संकट और शिकायतों के लिए भटक रहे नगरवासियों को अब पीएचईडी कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। पेयजल आपूर्ति से जुड़े सभी कार्यों को पीएचईडी विभाग ने नगर परिषद को हस्तांतरित कर दिया है। शुक्रवार को पीएचईडी की जेई आकांक्षा ने विभागीय प्रक्रिया पूरी कर जलापूर्ति व्यवस्था नप को सौंप दी।हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब शहर में पाइपलाइन की मरम्मत, लीकेज ठीक कराने, नए नल लगाने और खराब पड़े नलों को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी नगर परिषद की होगी।

गौरतलब है कि शहर में बिछाई गई जलापूर्ति पाइपलाइन कई जगहों पर जर्जर हो चुकी है। दर्जनों स्थानों पर पाइप में छेद होने के कारण रोजाना हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। वहीं, कई जगहों पर लगाए गए सार्वजनिक नल टूटकर बेकार पड़े हैं, जिससे लोगों को पेयजल के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है।नगर परिषद के स्वच्छता पदाधिकारी राजीव रंजन ने बताया कि शहरी क्षेत्र में जहां-जहां पाइप लीकेज की समस्या है और जहां पेयजल के लिए नल की आवश्यकता है, वहां काम कराने के लिए टीम गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगले 20 से 25 दिनों में शहर की जलापूर्ति व्यवस्था में बदलाव दिखाई देने लगेगा।

हैंडओवर से पहले पीएचईडी और नगर परिषद के अभियंताओं ने संयुक्त रूप से पूरे शहरी क्षेत्र का निरीक्षण कर जलापूर्ति व्यवस्था की स्थिति की जानकारी ली है। अधिकारियों के अनुसार उन्हें शहर की मौजूदा स्थिति से अवगत करा दिया गया है।मालूम हो कि डुमरांव नगर क्षेत्र के कई हिस्सों में अब तक नल-जल योजना की सुविधा पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है। वहीं विस्तारित क्षेत्र में स्थिति और भी खराब है। जलापूर्ति व्यवस्था नगर परिषद को मिलने के बाद नगरवासियों में उम्मीद जगी है कि अब शिकायतों का समाधान स्थानीय स्तर पर होगा और उन्हें पेयजल के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।