नया भोजपुर पैक्स बैंक घोटाला: सामूहिक आवेदन पर 2 करोड़ से अधिक गबन का दर्ज हुआ एफआईआर, जांच तेज

नया भोजपुर के पैक्स बैंक घोटाले मामले में पीड़ितों के सामूहिक आवेदन पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर लिया है। कुल 32 पीड़ितों द्वारा पुलिस को दिए आवेदन में पैक्स बैंक पर दो करोड़ से अधिक की राशि गबन का आरोप लगाया गया है।

नया भोजपुर पैक्स बैंक घोटाला: सामूहिक आवेदन पर 2 करोड़ से अधिक गबन का दर्ज हुआ एफआईआर, जांच तेज

-- पैक्स की तिजोरी खाली, जमाकर्ताओं की उम्मीदें छलनी, नया भोजपुर में 2 करोड़ के गबन ने खोली सहकारिता तंत्र की पोल

-- आरडी-एफडी के नाम पर भरोसे की लूट, बैंक पर ताला, एजेंट फरार, सामूहिक शिकायत के बाद पुलिस व सहकारिता विभाग हरकत में

केटी न्यूज/डुमरांव

नया भोजपुर के पैक्स बैंक घोटाले मामले में पीड़ितों के सामूहिक आवेदन पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर लिया है। कुल 32 पीड़ितों द्वारा पुलिस को दिए आवेदन में पैक्स बैंक पर दो करोड़ से अधिक की राशि गबन का आरोप लगाया गया है। बता दें कि नया भोजपुर की भोजपुर जदीद पैक्स अब केवल एक बैंक नहीं, बल्कि सैकड़ों लोगों के टूटे भरोसे की कहानी बन चुकी है। वर्षों तक अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित समझकर जिस पैक्स में जमा कराया गया, वही आज कथित रूप से करीब दो करोड़ रुपये के गबन का केंद्र बन गया है। बुधवार को जब पीड़ित खाताधारकों ने सामूहिक रूप से नया भोजपुर थाने का रुख किया, तो यह साफ हो गया कि मामला अब “प्रबंधन की लापरवाही” नहीं, बल्कि “सुनियोजित आर्थिक घोटाले” की शक्ल ले चुका है।

-- भरोसे का बैंक, गबन का अड्डा

पीड़ितों का आरोप है कि भोजपुर जदीद पैक्स में बचत खाता, आरडी और एफडी के नाम पर वर्षों से आम लोगों से पैसा जमा कराया गया। सब्जी विक्रेता, ठेला लगाने वाले, छोटे दुकानदार और ग्रामीण मजदूर, जिनके लिए हजार-बीस हजार की बचत भी जीवन का सहारा होती है। उन्होंने इस पैक्स को अपना बैंक माना, लेकिन 2023 से जैसे ही जमा राशि की परिपक्वता आई, भुगतान के बजाय केवल तारीखें मिलती रहीं।कुछ महीनों तक “आज-कल”, “अगले हफ्ते” का खेल चलता रहा, फिर एक दिन बैंक पर ताला लटक गया। न कर्मचारी, न प्रबंधक सिर्फ सन्नाटा। यहीं से खाताधारकों को यह एहसास हुआ कि उनके साथ कुछ बड़ा खेल हो चुका है।

-- चार नामजद, सामूहिक शिकायत

शिकायतकर्ताओं की अगुवाई कर रहे विकास कुमार ने आरोप लगाया कि बैंक प्रबंधन ने सुनियोजित तरीके से जमाकर्ताओं की राशि हड़प ली। आवेदन में चार लोगों को नामजद करते हुए कहा गया है कि खाताधारकों के पासबुक और दस्तावेज भी “निकासी की प्रक्रिया” के बहाने जमा करा लिए गए, ताकि भविष्य में कोई ठोस दावा न किया जा सके।पीड़ितों का दावा है कि कुल जमा राशि करीब दो करोड़ रुपये के आसपास है। जब वे बैंक संचालकों के घर जाकर अपनी रकम मांगते हैं, तो कथित रूप से बदसलूकी की जाती है और उन्हें भगा दिया जाता है।

-- एजेंटों का नेटवर्क और छोटे कारोबारियों की लूट

इस घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू एजेंटों की भूमिका है। आरोप है कि एजेंटों के माध्यम से नया भोजपुर सब्जी मंडी और आसपास के इलाकों में छोटे व्यापारियों से करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपये जमा कराए गए। परिपक्वता अवधि पूरी होने के बावजूद एक भी रुपया वापस नहीं किया गया। अब स्थिति यह है कि संबंधित एजेंट फोन उठाना बंद कर चुका है।यह सवाल भी उठ रहा है कि पैक्स जैसी सहकारी संस्था में एजेंटों के जरिये इतनी बड़ी राशि कैसे जमा कराई गई और इसकी निगरानी किसने की।

-- पहले भी दबा था मामला

पीड़ितों का कहना है कि 2025 में भी यह मामला सामने आया था। उस समय बैंक संचालकों ने कुछ चुनिंदा लोगों का पैसा लौटा दिया, जिससे बाकी जमाकर्ताओं को उम्मीद जगी कि सबका पैसा मिल जाएगा। इसी भरोसे में तब एफआईआर नहीं कराई गई। लेकिन आज वही भरोसा सबसे बड़ी भूल साबित हो रहा है।

-- सहकारिता विभाग और पुलिस हरकत में

मामले की गंभीरता को देखते हुए सहकारिता मंत्री प्रमोद कुमार ने जांच के निर्देश दिए हैं। संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियां, पटना प्रमंडल ने भी जिला सहकारिता पदाधिकारी को कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। दूसरी ओर, नया भोजपुर थानाध्यक्ष चंदन कुमार ने आवेदन मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत जांच की जाएगी।एसपी शुभम आर्य के समक्ष भी पीड़ितों ने अपनी पीड़ा रखी है। पुलिस का दावा है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर कोताही नहीं बरती जाएगी।

-- सिस्टम पर बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ एक पैक्स या एक गांव का नहीं है। यह सहकारिता तंत्र की निगरानी व्यवस्था, ऑडिट प्रणाली और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि समय रहते जांच और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घोटाला आने वाले दिनों में और बड़े संकट का रूप ले सकता है।फिलहाल, पुलिस और प्रशासनिक सक्रियता से पीड़ितों में उम्मीद जगी है। लेकिन सवाल वही है, क्या दोषियों तक कानून पहुंचेगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। नया भोजपुर के सैकड़ों परिवार आज इसी जवाब का इंतजार कर रहे हैं।