डुमरांव में आदेश बेअसर: खुले में कटा मांस बिकता रहा, हरकत में आया नगर परिषद प्रशासन
वासंतिक नवरात्र जैसे धार्मिक अवसरों के मद्देनजर राज्य सरकार द्वारा खुले में कटे मांस की बिक्री पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद डुमरांव में शनिवार को नियमों की खुली अनदेखी देखने को मिली। नगर परिषद क्षेत्र के स्टेशन रोड, चुड़ी बाजार समेत कई प्रमुख इलाकों में खुलेआम कटे मांस की बिक्री जारी रही, जिससे प्रशासनिक निर्देशों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो गए।

__ स्टेशन रोड व चुड़ी बाजार में खुलेआम बिक्री, शिकायत मिलते ही ईओ ने दी सख्त चेतावनी—दोबारा पकड़े जाने पर जुर्माने की बात
केटी न्यूज/डुमरांव:
वासंतिक नवरात्र जैसे धार्मिक अवसरों के मद्देनजर राज्य सरकार द्वारा खुले में कटे मांस की बिक्री पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद डुमरांव में शनिवार को नियमों की खुली अनदेखी देखने को मिली। नगर परिषद क्षेत्र के स्टेशन रोड, चुड़ी बाजार समेत कई प्रमुख इलाकों में खुलेआम कटे मांस की बिक्री जारी रही, जिससे प्रशासनिक निर्देशों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो गए।स्थानीय निवासी सह भाजपा नेता विनोद पासवान ने इस गंभीर मामले को उजागर करते हुए खुले में मांस बिक्री की तस्वीरें नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ), डुमरांव थाना के साइबर सेनानी समूह तथा अन्य वरीय अधिकारियों को भेजीं।

उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि नवरात्र के दौरान शहर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय होता है, ऐसे में इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था को भी ठेस पहुंचाने वाली हैं।शिकायत मिलते ही नगर परिषद प्रशासन सक्रिय हुआ। खुद ईओ राहुलधर दूबे मौके पर पहुंचे और विभिन्न मांस विक्रेताओं की दुकानों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने दुकानदारों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि खुले में कटे मांस की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है और भविष्य में ऐसा दोबारा पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों से जुर्माना वसूला जाएगा और आवश्यक होने पर अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह की स्थिति सामने आई है। इससे पहले भी नगर परिषद द्वारा मांस विक्रेताओं को नोटिस जारी कर खुले में बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया जा चुका है। इसके बावजूद बार-बार नियमों की अनदेखी होना प्रशासनिक निगरानी और सख्ती पर सवाल खड़ा करता है।

