चौसा में पानी के लिए हाहाकार, जिम्मेदारी की फाइलों में उलझी जलापूर्ति

नगर पंचायत चौसा में पेयजलापूर्ति व्यवस्था विभागीय जिम्मेदारियों की उलझन में फंसकर रह गई है। नगर क्षेत्र की दो महत्वपूर्ण जलमीनारों के मोटर खराब होने के कारण बड़ी आबादी के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। एक जलमीनार का मोटर पांच दिनों से बंद है, जबकि दूसरी जलमीनार का मोटर करीब डेढ़ महीने से खराब पड़ा है।

चौसा में पानी के लिए हाहाकार, जिम्मेदारी की फाइलों में उलझी जलापूर्ति

__ दो जलमीनारों के मोटर खराब, एक पांच दिन तो दूसरा डेढ़ माह से बंद; चार वार्डों के सैकड़ों घर प्रभावित, विभागीय खींचतान से बढ़ रही लोगों की परेशानी

केटी न्यूज/चौसा

नगर पंचायत चौसा में पेयजलापूर्ति व्यवस्था विभागीय जिम्मेदारियों की उलझन में फंसकर रह गई है। नगर क्षेत्र की दो महत्वपूर्ण जलमीनारों के मोटर खराब होने के कारण बड़ी आबादी के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। एक जलमीनार का मोटर पांच दिनों से बंद है, जबकि दूसरी जलमीनार का मोटर करीब डेढ़ महीने से खराब पड़ा है। इसके बावजूद अब तक मरम्मत नहीं होने से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।नगर पंचायत के वार्ड संख्या चार में दुर्गा मोड़ के समीप स्थित पीएचईडी की जलमीनार का मोटर पिछले पांच दिनों से जला हुआ है। इसके चलते आसपास के करीब चार वार्डों में रहने वाले सैकड़ों परिवारों की नियमित पेयजलापूर्ति प्रभावित हो गई है। पानी के लिए लोगों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। स्थानीय लोग समस्या के समाधान के लिए नगर पंचायत और पीएचईडी कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें राहत की ठोस पहल नजर नहीं आ रही।इसी तरह वार्ड संख्या 11 के कनकनारायणपुर मोहल्ले में स्थित जलमीनार का मोटर करीब डेढ़ महीने से खराब है। लंबे समय से जलापूर्ति बाधित रहने के कारण यहां भी लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।

__ जिम्मेदारी पर आमने-सामने विभाग

पेयजल संकट के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि खराब मोटरों की मरम्मत आखिर कौन कराएगा। पीएचईडी का कहना है कि जलापूर्ति व्यवस्था का प्रभार नगर पंचायत को सौंप दिया गया है। इसलिए मोटर की मरम्मत समेत आगे की जिम्मेदारी नगर पंचायत की है।वहीं नगर पंचायत का तर्क है कि प्रभार हस्तांतरण के दौरान बिजली के बकाये, मोटर संचालन में लगे कर्मियों की संख्या, लंबित मानदेय और अन्य आवश्यक संसाधनों का स्पष्ट लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया गया। ऐसे में जिम्मेदारी को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी रानी कुमारी ने बताया कि जले हुए मोटरों का निराकरण फिलहाल पीएचईडी विभाग ही कर सकता है। समस्या को जिलाधिकारी के संज्ञान में भी लाया गया है।

__ विभागीय दावों के बीच जनता बेहाल

दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर जारी खींचतान का खामियाजा सीधे आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। लोगों ने प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर खराब मोटरों की मरम्मत कराने और नियमित पेयजलापूर्ति बहाल करने की मांग की है।