रावण बोलेगा अपना पक्ष: सदियों पुरानी मान्यताओं को चुनौती देगी नई फिल्म

भारतीय सिनेमा में जहां अधिकतर पुरानी और स्थापित कथाओं को बार-बार दोहराया जाता रहा है, वहीं अब एक ऐसी फिल्म आने जा रही है जो सदियों पुरानी मान्यताओं को नए दृष्टिकोण से परखने का साहस कर रही है। फिल्म ‘रावण स्पीक्स’ का पहला दृश्य पोस्टर मुंबई में आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। इस फिल्म का निर्देशन बेगूसराय निवासी युवा निर्देशक अभिनव ठाकुर कर रहे हैं।

रावण बोलेगा अपना पक्ष: सदियों पुरानी मान्यताओं को चुनौती देगी नई फिल्म

__ डॉ. अनुपम ओझा की चर्चित कृति से प्रेरित कहानी, निर्देशक अभिनव ठाकुर करेंगे नए विमर्श की प्रस्तुति

केटी न्यूज/डुमरांव

भारतीय सिनेमा में जहां अधिकतर पुरानी और स्थापित कथाओं को बार-बार दोहराया जाता रहा है, वहीं अब एक ऐसी फिल्म आने जा रही है जो सदियों पुरानी मान्यताओं को नए दृष्टिकोण से परखने का साहस कर रही है। फिल्म ‘रावण स्पीक्स’ का पहला दृश्य पोस्टर मुंबई में आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। इस फिल्म का निर्देशन बेगूसराय निवासी युवा निर्देशक अभिनव ठाकुर कर रहे हैं।निर्देशक अभिनव ठाकुर ने बताया कि यह फिल्म दर्शकों के साथ एक गंभीर संवाद स्थापित करेगी और सही-गलत, न्याय-अन्याय तथा नैतिकता के प्रश्नों पर सोचने को प्रेरित करेगी।

यह फिल्म रामा इंटरप्राइजेज के बैनर तले बन रही है, जबकि निर्माता अविजीत मंडल हैं।प्रतीकात्मक शैली में बनाई जा रही यह फिल्म समाज के दबे हुए सच और अनसुने पक्षों को सामने लाने का प्रयास करेगी।फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी कहानी साहित्यिक आधार पर टिकी है। यह फिल्म बक्सर जिले के सिमरी थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़का सिंहनपुरा गांव निवासी प्रसिद्ध साहित्यकार एवं सिनेमा चिंतक डॉ. अनुपम ओझा की चर्चित रचना ‘मैं रावण नहीं हूं’ से प्रेरित है। साहित्य जगत में इस रचना को महागाथा माना जाता है, क्योंकि इसमें रावण के दृष्टिकोण से एक वैकल्पिक पक्ष प्रस्तुत किया गया है।

डॉ. अनुपम ओझा ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से सिनेमा विषय पर प्रारंभिक शोध कार्य किया है। उनकी रचना में रावण को केवल खलनायक के रूप में नहीं, बल्कि सिद्धांतों, ज्ञान और तर्क रखने वाले पात्र के रूप में चित्रित किया गया है।यही कारण है कि यह कहानी पाठकों के बीच लंबे समय से चर्चा का विषय रही है।महागाथा की मूल कथा पारंपरिक राम-रावण युद्ध की प्रचलित व्याख्या से हटकर रावण के अंतर्मन और उसके विचारों को स्वर देती है। इसमें रावण को अहंकारी राक्षस नहीं, बल्कि प्रकांड विद्वान, दार्शनिक और सामाजिक संरचनाओं पर प्रश्न उठाने वाले व्यक्तित्व के रूप में दर्शाया गया है।

रचना यह बताने का प्रयास करती है कि उसके निर्णयों और परिस्थितियों के पीछे भी ठोस कारण थे। यही वैचारिक गहराई अब बड़े पर्दे पर दिखाई जाएगी।निर्देशक अभिनव ठाकुर इससे पहले भी सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों के लिए पहचान बना चुके हैं। वे लौंडा नाच पर आधारित द लिपस्टिक बॉय तथा डायन प्रथा पर आधारित बिसाही जैसी चर्चित फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील विषयों को पर्दे पर उतारना उनकी विशेषता रही है।अब ‘रावण स्पीक्स’ के माध्यम से वे दर्शकों को ऐसी सिनेमाई यात्रा पर ले जाने की तैयारी में हैं, जो केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि नई सोच और वैचारिक मंथन का अवसर भी देगी।