300 साल पुरानी अष्टधातु प्रतिमाओं की दोबारा हुई स्थापना, श्रीराम जानकी मठ में महायज्ञ का भक्तिमय समापन
बड़का ढकाईच। बड़का ढकाईच गांव स्थित ऐतिहासिक श्रीराम जानकी मठ ठाकुरबाड़ी में आयोजित श्रीराम दरबार, हनुमत सह श्री राधाकृष्ण प्राण-प्रतिष्ठात्मक महायज्ञ गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति के माहौल में संपन्न हो गया। महायज्ञ के अंतिम दिन विशेष आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

--चोरी के बाद बरामद हुईं ऐतिहासिक मूर्तियां अब वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर में विराजमान, अंतिम आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
केटी न्यूज/डुमरांव
बड़का ढकाईच। बड़का ढकाईच गांव स्थित ऐतिहासिक श्रीराम जानकी मठ ठाकुरबाड़ी में आयोजित श्रीराम दरबार, हनुमत सह श्री राधाकृष्ण प्राण-प्रतिष्ठात्मक महायज्ञ गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति के माहौल में संपन्न हो गया। महायज्ञ के अंतिम दिन विशेष आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। घंट-घड़ियाल की गूंज, दीपों की रोशनी और भक्ति गीतों के बीच पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक वातावरण से भर उठा।गोविंदाचार्य जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में वृंदावन धाम से आए संतों ने लगातार श्रीराम कथा और श्रीमद्भागवत कथा का प्रवचन किया। कथा श्रवण के लिए आसपास के गांवों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

संतों ने अपने प्रवचनों में धर्म, सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का संदेश दिया।इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण करीब 300 वर्ष पुरानी अष्टधातु की सात ऐतिहासिक मूर्तियों की पुनः प्राण-प्रतिष्ठा रही। भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान सहित राम दरबार की इन प्राचीन प्रतिमाओं के साथ राधा-कृष्ण और हनुमान जी की नई प्रतिमाओं की भी विधि-विधान से स्थापना की गई। विद्वान आचार्यों के निर्देशन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न प्राण-प्रतिष्ठा समारोह ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया।बताया जाता है कि ये प्राचीन अष्टधातु प्रतिमाएं 21 जनवरी 2023 की रात मंदिर से चोरी हो गई थीं। आरती के बाद हुई इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था।

हालांकि भोजपुर जिले के कोईलवर थाना की पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अगले ही दिन सभी मूर्तियों को बरामद कर लिया था।लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया में रहने के बाद कोर्ट के आदेश पर ग्रामीणों को हाल में मूर्तियां वापस मिलीं। करीब दो माह पूर्व बेल बॉन्ड पर मूर्तियां मिलने के बाद ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। अब पुनः प्राण-प्रतिष्ठा के साथ इन ऐतिहासिक प्रतिमाओं को मंदिर में स्थापित कर दिया गया।महायज्ञ के दौरान गंगा आरती की तर्ज पर विशेष यज्ञ आरती का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भाग लिया। दीपों की कतार और जयकारों के बीच यह क्षण लोगों के लिए भावुक और यादगार बन गया।

आयोजन की सफलता में स्थानीय ग्रामीणों का योगदान महत्वपूर्ण रहा। कन्हैया दुबे, रामेश्वर दुबे, सुधीर दुबे, रोहित दुबे, लक्ष्मण दुबे, कमलेश तिवारी, प्रिंस पीयूष और आलोक दुबे समेत कई लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई। श्रद्धालुओं के भोजन, ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं को भी बेहतर तरीके से संचालित किया गया।महायज्ञ का समापन केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर और आस्था के पुनर्जागरण का प्रतीक बन गया। प्राचीन प्रतिमाओं की वापसी और पुनर्स्थापना से ग्रामीणों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ।

