संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बने एसडीएम राकेश कुमार, वंचित दिव्यांगजनों को स्वयं बुलाकर बांटे कंबल

डुमरांव अनुमंडल में प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक सराहनीय उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब एसडीएम राकेश कुमार ने ठंड से जूझ रहे दिव्यांगजनों की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए त्वरित मानवीय पहल की। यह मामला डुमरांव स्थित बुनियाद केंद्र में आयोजित कंबल वितरण कार्यक्रम से जुड़ा है, जहां सीमित संसाधनों के कारण कई जरूरतमंद दिव्यांगजन कंबल से वंचित रह गए थे। कंबल नहीं मिलने से दिव्यांगजनों में निराशा व्याप्त हो गई थी।

संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बने एसडीएम राकेश कुमार, वंचित दिव्यांगजनों को स्वयं बुलाकर बांटे कंबल

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव अनुमंडल में प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक सराहनीय उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब एसडीएम राकेश कुमार ने ठंड से जूझ रहे दिव्यांगजनों की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए त्वरित मानवीय पहल की। यह मामला डुमरांव स्थित बुनियाद केंद्र में आयोजित कंबल वितरण कार्यक्रम से जुड़ा है, जहां सीमित संसाधनों के कारण कई जरूरतमंद दिव्यांगजन कंबल से वंचित रह गए थे। कंबल नहीं मिलने से दिव्यांगजनों में निराशा व्याप्त हो गई थी।इस स्थिति की जानकारी जैसे ही दिव्यांग संघ के जिलाध्यक्ष अगस्त उपाध्याय ने एसडीएम राकेश कुमार को दी, उन्होंने इसे सामान्य सूचना मानकर नजरअंदाज नहीं किया।

बल्कि, समस्या की गंभीरता को समझते हुए एसडीएम ने तुरंत कार्रवाई की और कंबल से वंचित सभी दिव्यांगजनों को अपने कार्यालय बुलाया। इसके बाद उन्होंने सभी जरूरतमंद दिव्यांग बंधुओं को कंबल उपलब्ध कराए, जिससे उनके चेहरों पर राहत और खुशी लौट आई।एसडीएम की इस पहल से दिव्यांगजनों में प्रशासन के प्रति विश्वास और भरोसा और मजबूत हुआ। दिव्यांग संघ के जिलाध्यक्ष अगस्त उपाध्याय ने कहा कि एसडीएम राकेश कुमार हमेशा दिव्यांगजनों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हैं और संवेदनशीलता के साथ उनका समाधान करते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारी समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं, जो अपने दायित्वों से आगे बढ़कर मानवीय कर्तव्यों का भी निर्वहन करते हैं।स्थानीय नागरिकों ने भी एसडीएम की इस पहल की जमकर सराहना की। लोगों का कहना है कि ठंड के मौसम में जरूरतमंदों तक समय पर सहायता पहुंचना किसी संजीवनी से कम नहीं है। यह घटना दर्शाती है कि यदि प्रशासन संवेदनशील हो, तो छोटे प्रयास भी समाज में बड़ा और सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। दिव्यांग बंधुओं के लिए यह पहल न केवल सहायता का माध्यम बनी, बल्कि सम्मान और अपनत्व का भी एहसास कराती नजर आई।