वन संरक्षण में पंचायतों की भूमिका बढ़ी, प्रशिक्षण में मिले नए अधिकारों की जानकारी
प्रखंड सभा कक्ष में बीपीआरओ अभिषेक पाठक के नेतृत्व में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन पंचायत प्रतिनिधियों को वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अधिकारों और जिम्मेदारियों की विस्तृत जानकारी दी गई। जिला पंचायत संसाधन केंद्र एवं पंचायतीराज विभाग की पहल पर आयोजित इस प्रशिक्षण में मुखिया एवं कार्यपालक सहायकों ने भाग लिया।
केटी न्यूज/राजपुर
प्रखंड सभा कक्ष में बीपीआरओ अभिषेक पाठक के नेतृत्व में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन पंचायत प्रतिनिधियों को वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अधिकारों और जिम्मेदारियों की विस्तृत जानकारी दी गई। जिला पंचायत संसाधन केंद्र एवं पंचायतीराज विभाग की पहल पर आयोजित इस प्रशिक्षण में मुखिया एवं कार्यपालक सहायकों ने भाग लिया।प्रशिक्षकों ओमप्रकाश राम, दिनेश कुमार सिन्हा और धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि अब पंचायतों की भूमिका केवल विकास योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वनों की देखरेख और संरक्षण की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई है।

इस संदर्भ में वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रावधानों की विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि अधिनियम के तहत वन क्षेत्रों में निवास करने वाले अनुसूचित जनजातियों को विशेष अधिकार दिए गए हैं और पंचायतों को उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करनी होगी।प्रशिक्षण में यह भी स्पष्ट किया गया कि अनुसूचित जनजाति का दावा करने वाले व्यक्ति को तीन पीढ़ियों का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।

दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में गांव के वरिष्ठतम व्यक्ति का प्रमाण मान्य हो सकता है।इसके साथ ही जल जीवन हरियाली योजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए जल, जंगल और जमीन के समन्वित संरक्षण पर बल दिया गया।कार्यक्रम में मुखिया अनिल सिंह, जगलाल चौधरी, आनंद प्रकाश सिंह, तुलसी साह, अजय राम, इंद्रावती देवी, मंजू देवी, संजय सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

