बुनियादी सुविधाओं से महरूम है रघुनाथपुर की अनुसूचित जाति बस्ती
ब्रह्मपुर प्रखंड के रघुनाथपुर पंचायत में विकास की हकीकत चौंकाने वाली है। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर चार के ठीक समीप स्थित 150 से अधिक घरों की एक पूरी बस्ती पिछले पंद्रह वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में है। न पक्की सड़क, न नाली की व्यवस्था और न ही समुचित बिजली, इस बस्ती की पहचान अब सरकारी उपेक्षा बन चुकी है।
केटी न्यूज/ब्रह्मपुर
ब्रह्मपुर प्रखंड के रघुनाथपुर पंचायत में विकास की हकीकत चौंकाने वाली है। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर चार के ठीक समीप स्थित 150 से अधिक घरों की एक पूरी बस्ती पिछले पंद्रह वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में है। न पक्की सड़क, न नाली की व्यवस्था और न ही समुचित बिजली, इस बस्ती की पहचान अब सरकारी उपेक्षा बन चुकी है।स्थानीय लोगों का कहना है कि पंद्रह साल पहले बसने के बावजूद आज तक यहां एक अदद नाली तक नहीं बन पाई। जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण घरों का गंदा पानी गलियों और कच्ची सड़कों पर बहता रहता है।

मजबूरी में लोगों ने कॉलोनी के भीतर जगह-जगह गड्ढे खोदकर पानी गिराने की अस्थायी व्यवस्था कर रखी है। बरसात के मौसम में हालात और भयावह हो जाते हैंकृकीचड़, जलजमाव और दुर्गंध के बीच लोगों का घर से निकलना दूभर हो जाता है। ऐसे हालात में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार मंडराता रहता है।बस्ती से मुख्य सड़क को जोड़ने वाला एकमात्र रास्ता रेलवे प्लेटफॉर्म नंबर चार के बगल से गुजरता है, जो लंबे समय तक जर्जर हालत में रहा।

प्रशासन की उदासीनता से तंग आकर ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर इस कच्चे रास्ते को किसी तरह आने-जाने लायक बनाया। यह हालात खुद-ब-खुद सवाल खड़ा करते हैं कि आखिर सरकारी योजनाएं किसके लिए बनती हैं।समाजसेवी शैलेश ओझा और शंभू चंद्रवंशी ने हाल ही में प्रखंड विकास पदाधिकारी से मुलाकात कर बस्ती को प्राथमिकता के आधार पर विकास योजनाओं में शामिल करने की मांग की है।

वहीं स्थानीय निवासी प्रिंस कुमार, अनिल कुमार कमांडो, मु. जलालुद्दीन, मुन्ना चौधरी, मनोज राय, मुन्नी खातून सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों के चक्कर लगाए जा रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है।ग्रामीणों का आक्रोश अब चरम पर है। हरेंद्र यादव, ओमप्रकाश गुप्ता, पंकज, भुवाली ठाकुर और अमरजीत कुमार ने साफ चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर नाली और सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे जिलाधिकारी से शिकायत करेंगे। इसके बाद भी समाधान नहीं हुआ तो बस्तीवासी आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
