राजपुर सीएचसी में चिकित्सकों की कमी गहराई, 245 गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर संकट

राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में चिकित्सकों की कमी एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गई है। चिकित्सा प्रभारी डॉ. अशोक कुमार को जिला सदर अस्पताल में पूर्णकालिक प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के बाद यहां स्वास्थ्य सेवाएं लगभग एक डॉक्टर के भरोसे सिमट गई हैं। ऐसे में प्रखंड के लगभग 245 गांवों की लाखों की आबादी की चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

राजपुर सीएचसी में चिकित्सकों की कमी गहराई, 245 गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर संकट

केटी न्यूज/राजपुर

राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में चिकित्सकों की कमी एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गई है। चिकित्सा प्रभारी डॉ. अशोक कुमार को जिला सदर अस्पताल में पूर्णकालिक प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के बाद यहां स्वास्थ्य सेवाएं लगभग एक डॉक्टर के भरोसे सिमट गई हैं। ऐसे में प्रखंड के लगभग 245 गांवों की लाखों की आबादी की चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।अब तक डॉ. अशोक कुमार के नेतृत्व में अस्पताल का संचालन सुचारू रूप से हो रहा था। वे सप्ताह में एक दिन सदर अस्पताल में सेवाएं देते थे, लेकिन पूर्णकालिक तबादले के बाद राजपुर सीएचसी में नियमित चिकित्सक की उपलब्धता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

वर्तमान में डॉ. सुनील कुमार और एक आयुष चिकित्सक के सहारे अस्पताल चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. सुनील कुमार भी अस्वस्थ रहते हैं, जिससे मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है।हालांकि यहां नियमित टीकाकरण, पल्स पोलियो, कुष्ठ उन्मूलन समेत विभिन्न स्वास्थ्य योजनाएं आशा कर्मियों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के सहयोग से संचालित हो रही हैं, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में गंभीर मरीजों को रेफर करना मजबूरी बन गई है। खासकर हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं होने से सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को तत्काल राहत नहीं मिल पाती।

बक्सर-कोचस मुख्य मार्ग पर आए दिन हो रही दुर्घटनाओं के मद्देनजर स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है। पिछले सप्ताह हुई घटनाओं में एक युवक की मौत और कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।पूर्व मुखिया सत्येंद्र नारायण सिंह, पैक्स अध्यक्ष विपिन बिहारी सिंह समेत कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि राजपुर सीएचसी में स्थायी रूप से चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई तो जनआंदोलन किया जाएगा।