तालाब सुंदरीकरण में गुणवत्ता पर बवाल, ग्रामीणों ने बंद कराया निर्माण
प्रखंड के फफदर गांव में तालाब सुंदरीकरण के नाम पर चल रहा निर्माण कार्य विवादों में घिर गया है। निर्माण में कथित तौर पर मानकों की अनदेखी और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने काम रुकवा दिया। ग्रामीणों के विरोध के बाद योजना की गुणवत्ता, निगरानी और कार्यस्थल पर पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

__ फफदर में लाखों की योजना पर पारदर्शिता के सवाल, प्राक्कलन बोर्ड नहीं लगाने का भी आरोप
केटी न्यूज/चौगाईं।
प्रखंड के फफदर गांव में तालाब सुंदरीकरण के नाम पर चल रहा निर्माण कार्य विवादों में घिर गया है। निर्माण में कथित तौर पर मानकों की अनदेखी और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने काम रुकवा दिया। ग्रामीणों के विरोध के बाद योजना की गुणवत्ता, निगरानी और कार्यस्थल पर पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।ग्रामीण टिंकू सिंह, गणेश ओझा, अशोक सिंह, हृदयनारायण सिंह, रमेश सिंह और रामनारायण सिंह समेत अन्य का आरोप है कि तालाब सुंदरीकरण के कार्य में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर भी ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है।

उनका कहना है कि लाखों रुपये की लागत वाली योजना में यदि शुरुआत से ही गुणवत्ता से समझौता हुआ तो इसका लाभ लंबे समय तक ग्रामीणों को नहीं मिल सकेगा।ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर प्राक्कलन बोर्ड नहीं लगाए जाने को भी गंभीर मामला बताया। उनका कहना है कि बोर्ड के अभाव में योजना की स्वीकृत राशि, कार्य एजेंसी, योजना संख्या और निर्माण से संबंधित अन्य जरूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं हो रही है। इससे योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

बताया गया कि स्थानीय विधायक की अनुशंसा पर योजना विभाग से तालाब सुंदरीकरण की योजना स्वीकृत हुई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग के तकनीकी अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्राक्कलन के अनुरूप कार्य की जांच करे।ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने और निर्माण की गुणवत्ता संतोषजनक पाए जाने के बाद ही काम आगे बढ़ने दिया जाएगा। उनका कहना है कि सरकारी राशि जनता की कमाई है और उसके खर्च में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

