Thursday, 5 November 2026
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सरकारी स्कूलों की बदहाली पर बहुजन सेना ने उठाए सवाल, बोली- सुविधाएं सुधारें फिर सख्ती करें सरकार

बिहार में सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर शिक्षा विभाग की सख्ती और एआई आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बहुजन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल कुमार ने शिक्षा मंत्री के निर्देशों पर सवाल उठाते हुए पहले सरकारी स्कूलों की आधारभूत व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है।

सरकारी स्कूलों की बदहाली पर बहुजन सेना ने उठाए सवाल, बोली- सुविधाएं सुधारें फिर सख्ती करें सरकार

सरकारी स्कूलों की बदहाली पर बहुजन सेना ने उठाए सवाल, बोली- सुविधाएं सुधारें फिर सख्ती करें सरकार

__ शिक्षकों की निगरानी व्यवस्था पर अनिल कुमार का हमला, शौचालय-पेयजल समेत मूलभूत संसाधनों की कमी दूर करने की मांग

केटी न्यूज/बक्सर।

बिहार में सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर शिक्षा विभाग की सख्ती और एआई आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बहुजन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल कुमार ने शिक्षा मंत्री के निर्देशों पर सवाल उठाते हुए पहले सरकारी स्कूलों की आधारभूत व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है।अनिल कुमार ने कहा कि सरकार शिक्षकों की जवाबदेही तय करने की बात कर रही है, लेकिन इससे पहले विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के कई सरकारी स्कूलों में आज भी शौचालय, स्वच्छ पेयजल और जरूरी संसाधनों की कमी बनी हुई है।

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ऐसी स्थिति में केवल शिक्षकों पर नियमों का दबाव बनाना उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि विद्यालयों में पढ़ाई का बेहतर माहौल बनाने के लिए शिक्षक और छात्र दोनों के लिए जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता जरूरी है। बहुजन सेना अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जिन स्कूलों में पर्याप्त शौचालय तक नहीं हैं, वहां शिक्षक और छात्र अपनी दैनिक आवश्यकताओं को कैसे पूरा करेंगे। उन्होंने सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।अनिल कुमार ने शिक्षा विभाग की नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में लगातार नए नियम लागू किए जा रहे हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करने की गति धीमी है।

सरकारी स्कूलों की बदहाली पर बहुजन सेना ने उठाए सवाल, बोली- सुविधाएं सुधारें फिर सख्ती करें सरकार

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल निगरानी और उपस्थिति व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्कूलों को संसाधनों से लैस करना भी जरूरी है।उन्होंने निजी शिक्षण संस्थानों को लेकर भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किए बिना निजी संस्थानों को बढ़ावा देना गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के हित में नहीं है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या निजी संस्थानों में आर्थिक रूप से कमजोर, दलित और पिछड़े वर्ग के बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराने की कोई ठोस व्यवस्था है।बहुजन सेना अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा का अधिकार सभी बच्चों के लिए समान होना चाहिए और सरकारी विद्यालयों को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

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उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सुविधाओं की कमी दूर किए बिना सिर्फ शिक्षकों पर सख्ती की गई, तो इससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था की समस्याएं और बढ़ सकती हैं।गौरतलब है कि शिक्षा विभाग की ओर से हाल के दिनों में शिक्षकों की उपस्थिति, समय पालन और कार्यप्रणाली को लेकर कई कदम उठाए गए हैं। इसी बीच बहुजन सेना की प्रतिक्रिया ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।

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