एमवी कॉलेज के पूर्व प्रभारी प्राचार्य प्रो. रामाशीष सिंह का निधन, शैक्षणिक जगत में शोक की लहर
महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय (एमवी कॉलेज), बक्सर के पूर्व प्रभारी प्राचार्य एवं भौतिक विज्ञान विभाग के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. (डॉ.) रामाशीष सिंह का बुधवार की सुबह लगभग 4 बजे 85 वर्ष की आयु में आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही महाविद्यालय परिवार सहित पूरे शैक्षणिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

__ 85 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, विद्यार्थियों और सहकर्मियों के लिए थे प्रेरणास्रोत
केटी न्यूज/बक्सर:
महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय (एमवी कॉलेज), बक्सर के पूर्व प्रभारी प्राचार्य एवं भौतिक विज्ञान विभाग के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. (डॉ.) रामाशीष सिंह का बुधवार की सुबह लगभग 4 बजे 85 वर्ष की आयु में आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही महाविद्यालय परिवार सहित पूरे शैक्षणिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।प्रो. सिंह ने अपने लंबे शैक्षणिक जीवन में शिक्षा, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। वर्ष 2007 में उन्होंने महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए संस्थान को नई दिशा दी।

वे न केवल एक कुशल शिक्षक थे, बल्कि एक मार्गदर्शक और प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में भी जाने जाते थे। उनका सरल स्वभाव, कर्तव्यनिष्ठा और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण उन्हें सभी के बीच विशेष बनाता था।उनके निधन पर महाविद्यालय परिसर में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) कृष्णा कान्त सिंह के नेतृत्व में शोकसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।शोकसभा को संबोधित करते हुए प्राचार्य प्रो. कृष्णा कान्त सिंह ने कहा कि प्रो. रामाशीष सिंह का निधन महाविद्यालय परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है।

उनकी विद्वता, अनुशासनप्रियता और शिक्षा के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।इस अवसर पर सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो. (डॉ.) श्याम जी मिश्रा, प्रो. (डॉ.) सुरेन्द्र सिंह सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।प्रो. रामाशीष सिंह का जाना शिक्षा जगत के लिए एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है।

