इतिहास, आस्था और रोमांच से रूबरू हुए छात्र, अनंतविजयम एकेडमी का राजगीर-नालंदा शैक्षणिक भ्रमण संपन्न

अनंतविजयम एकेडमी, महाराजा पथ डुमरांव द्वारा आयोजित राजगीर एवं नालंदा का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण उत्साह, जिज्ञासा और ऐतिहासिक चेतना के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस शैक्षणिक यात्रा को एकेडमी के प्रेसिडेंट चन्दन कुमार मिश्र ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। भ्रमण में करीब दो सौ छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से बाहर निकालकर भारत की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से सीधे जोड़ना था।

इतिहास, आस्था और रोमांच से रूबरू हुए छात्र, अनंतविजयम एकेडमी का राजगीर-नालंदा शैक्षणिक भ्रमण संपन्न

-- दो सौ छात्र-छात्राओं ने देखा नालंदा विश्वविद्यालय का गौरव, राजगीर के शांति स्तूप, सफारी और पौराणिक धरोहरों ने बढ़ाया उत्साह

केटी न्यूज/डुमरांव

अनंतविजयम एकेडमी, महाराजा पथ डुमरांव द्वारा आयोजित राजगीर एवं नालंदा का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण उत्साह, जिज्ञासा और ऐतिहासिक चेतना के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस शैक्षणिक यात्रा को एकेडमी के प्रेसिडेंट चन्दन कुमार मिश्र ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। भ्रमण में करीब दो सौ छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से बाहर निकालकर भारत की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से सीधे जोड़ना था।इस दौरान छात्र-छात्राओं ने विश्वविख्यात नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेषों का अवलोकन किया।कभी ज्ञान, दर्शन और बौद्ध शिक्षा का वैश्विक केंद्र रहे नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेषों को देखकर विद्यार्थियों ने भारत की प्राचीन शैक्षिक समृद्धि को करीब से महसूस किया।

ईंटों से बने विशाल विहार, प्राचीन कक्षाएं, स्तूप और अवशेष आज भी उस गौरवशाली परंपरा की कहानी कहते हैं, जब दुनिया के विभिन्न देशों से विद्यार्थी यहां अध्ययन करने पहुंचते थे।वहीं राजगीर की धरती ने भी बच्चों को इतिहास, अध्यात्म और प्रकृति का अद्भुत संगम दिखाया। पर्वतों से घिरे राजगीर का संबंध न सिर्फ बौद्ध धर्म से है, बल्कि जैन और हिन्दू परंपराओं से भी इसकी गहरी आस्था जुड़ी है। मान्यता है कि राजगीर प्राचीन मगध की राजधानी रहा और महाभारत काल में यह जरासंध की नगरी के रूप में प्रसिद्ध था।भगवान बुद्ध ने यहां कई महत्वपूर्ण उपदेश दिए थे, जबकि जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर मुनिसुव्रतनाथ से भी इस क्षेत्र का संबंध माना जाता है।छात्रों ने राजगीर स्थित बौद्ध शांति स्तूप का भी दर्शन किया। पहाड़ियों के बीच स्थित यह स्तूप शांति, करुणा और सह-अस्तित्व का संदेश देता है।

यहां का शांत वातावरण विद्यार्थियों के लिए एक अलग ही अनुभव लेकर आया। इसके अलावा राजगीर सफारी में वन्यजीवों को करीब से देखने का अवसर बच्चों के लिए रोमांचकारी रहा। प्राकृतिक परिवेश, हरियाली और जीव-जंतुओं की विविधता ने भ्रमण को और भी यादगार बना दिया।स्कूल प्रेसिडेंट चन्दन कुमार मिश्र ने बताया कि इस शैक्षिक भ्रमण का उद्देश्य छात्रों को भारत की ऐतिहासिक धरोहरों, सांस्कृतिक विरासत और उन महापुरुषों के योगदान से परिचित कराना था, जिन्होंने भारत को वैभवशाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।उन्होंने कहा कि ऐसी यात्राएं विद्यार्थियों के भीतर इतिहास के प्रति जिज्ञासा, संस्कृति के प्रति सम्मान और सीखने की नई दृष्टि विकसित करती हैं।

भ्रमण में शामिल शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया और विभिन्न स्थलों के महत्व से उन्हें अवगत कराया।इस मौके पर संतोष कुमार राय, राजकुमार शर्मा, पूनम तिवारी, माधवी मिश्रा, सिद्धि कुमारी, शिवम गुप्ता, शाक्या प्रिया, तरुण, विद्यावती कुमारी, अनुष्का सिंह, स्नेहा, तराना, रामबचन शर्मा, निखिल कुमार, डॉली सिंह, काजल, अनु दुबे, विनीता, डॉली सिंह, शालिनी सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए केवल यात्रा नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था, संस्कृति और प्रकृति से साक्षात्कार का जीवंत पाठ साबित हुआ।