बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खेती के साथ-साथ अब स्वरोजगार की ओर बढ़ रहे केसठ के कदम

समय के पहिए के साथ गांवों की सूरत अब तेजी से बदल रही है। कभी पूरी तरह खेती और परदेश की नौकरियों पर निर्भर रहने वाला गांव अब आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहा है। प्रखंड के केसठ नया बाजार और आस-पास के ग्रामीण इलाकों में बढ़ती महंगाई और गरीबी के बीच लोगों ने स्वरोजगार को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है।

बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खेती के साथ-साथ अब स्वरोजगार की ओर बढ़ रहे केसठ के कदम

केटी न्यूज/केसठ।

समय के पहिए के साथ गांवों की सूरत अब तेजी से बदल रही है। कभी पूरी तरह खेती और परदेश की नौकरियों पर निर्भर रहने वाला गांव अब आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहा है। प्रखंड के केसठ नया बाजार और आस-पास के ग्रामीण इलाकों में बढ़ती महंगाई और गरीबी के बीच लोगों ने स्वरोजगार को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है।

--बाजार में बढ़ी रौनक, स्वरोजगार से लड़ रहे महंगाई की जंग

बदलती जीवनशैली का असर अब केसठ की सड़कों पर साफ दिखने लगा है। नया बाजार अब केवल एक चौक-चौराहों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहाँ ठेले और छोटी दुकानों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। लोग अब दूसरों के आगे हाथ फैलाने या पलायन करने के बजाय अपने गांव में ही चाय, समोसा और चना-चाट जैसे छोटे-छोटे स्टॉल लगाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।

--गली-गली में खुल रही है दुकानें

बदलाव की यह बयार सिर्फ मुख्य बाजार तक सीमित नहीं है। अब गांव की गलियों के अंदर भी कपड़े, श्रृंगार और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की दुकानें खुल गई हैं। महिलाओं और युवाओं ने अपने घरों के बरामदों को ही रोजगार का जरिया बना लिया है।

--पलायन पर लगाम और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे है लोग

स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ती महंगाई ने जीवन यापन मुश्किल कर दिया है, लेकिन छोटे-छोटे रोजगार ने एक उम्मीद जगाई है। जो लोग पहले काम की तलाश में गैर-राज्यों की ओर रुख करते थे, उनमें से कई अब अपने घर पर ही छोटी पूंजी से व्यापार कर सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।गांव अब शहर की तर्ज पर विकसित हो रहा है। लोगों की जरूरतें बढ़ी हैं, तो उन जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।गांव का शहर की ओर बढ़ना केवल बुनियादी ढाँचे का विकास नहीं, बल्कि ग्रामीण सोच और आजीविका के तरीकों में आया एक बड़ा सकारात्मक बदलाव है।