महिला आयोग की सख्ती से झुका परिवार, बेघर बहू-बेटे को मिला अपना आशियाना

एक परिवार को बिखरने से बचाने में बिहार राज्य महिला आयोग और बक्सर पुलिस की संयुक्त पहल मिसाल बन गई। घरेलू विवाद और पारिवारिक कलह के कारण घर से निकाले गए दंपती को आखिरकार न्याय मिला और सोमवार को पुलिस की मौजूदगी में उन्हें सम्मानपूर्वक उनके ही घर में दोबारा प्रवेश कराया गया।

महिला आयोग की सख्ती से झुका परिवार, बेघर बहू-बेटे को मिला अपना आशियाना

--पुलिस की मौजूदगी में बच्चों संग कराया गया गृह प्रवेश, महीनों से भटक रहा था परिवार

केटी न्यूज/बक्सर

एक परिवार को बिखरने से बचाने में बिहार राज्य महिला आयोग और बक्सर पुलिस की संयुक्त पहल मिसाल बन गई। घरेलू विवाद और पारिवारिक कलह के कारण घर से निकाले गए दंपती को आखिरकार न्याय मिला और सोमवार को पुलिस की मौजूदगी में उन्हें सम्मानपूर्वक उनके ही घर में दोबारा प्रवेश कराया गया। इस दौरान मासूम बच्चे भी अपने माता-पिता के साथ मौजूद रहे।मामला राजपुर थाना क्षेत्र के गोसाईपुर गांव से जुड़ा है। पीड़िता चिंतामणि कुमारी ने बिहार राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उन्हें छोटी बच्ची के साथ प्रताड़ित कर ससुराल से निकाल दिया गया।शिकायत में यह भी कहा गया था कि उनके स्त्रीधन को बेच दिया गया तथा परिवार की संपत्ति दूसरी पत्नी के नाम करने की कोशिश की जा रही है।

लगातार अपमान और बेघर होने की पीड़ा झेल रही महिला ने आयोग से न्याय की गुहार लगाई थी।मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार राज्य महिला आयोग ने वाद संख्या 1583/25 दर्ज कर त्वरित संज्ञान लिया। आयोग ने बक्सर पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य को पत्र भेजकर पीड़िता और उसके परिवार को कानूनी अधिकार दिलाने तथा सुरक्षित तरीके से ससुराल में बसाने का निर्देश दिया।एसपी के निर्देश पर संबंधित थाने की पुलिस सक्रिय हुई और सोमवार को नगर परिषद बक्सर क्षेत्र के पांडेय पट्टी स्थित आवास पर पहुंचकर पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई। पुलिस टीम की मौजूदगी में चिंतामणि कुमारी, उनके पति राहुल कुमार पाण्डेय और बच्चों को सम्मान के साथ घर में प्रवेश कराया गया।

इस दौरान किसी प्रकार का विवाद न हो, इसके लिए सुरक्षा के भी इंतजाम किए गए थे।बताया जाता है कि पिता मृत्युंजय पाण्डेय द्वारा पुत्र राहुल पाण्डेय, पुत्रवधू और बच्चों को घर से अलग कर दिया गया था, जिसके बाद परिवार लंबे समय से दर-दर भटकने को मजबूर था। आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहे इस परिवार के लिए महिला आयोग का हस्तक्षेप राहत बनकर सामने आया।घटना के बाद इलाके में महिला आयोग और पुलिस प्रशासन की सक्रियता की चर्चा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं होता तो परिवार पूरी तरह टूट सकता था। लोगों ने इसे महिलाओं और बेसहारा परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में प्रशासन की संवेदनशील पहल बताया है।