पीएम की अपील का असर : डुमरांव विधायक राहुल सिंह ने ट्रेन से तय किया बक्सर से पटना तक का सफर
राजनीति में अक्सर नेताओं के लंबे काफिले और चमचमाती गाड़ियों की तस्वीरें देखने को मिलती हैं, लेकिन गुरुवार को डुमरांव के विधायक राहुल कुमार सिंह ने इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश की। उन्होंने बक्सर से पटना तक करीब 110 किलोमीटर का सफर किसी लग्जरी वाहन से नहीं, बल्कि मगध एक्सप्रेस के एमवन कोच में आम यात्रियों के बीच बैठकर पूरा किया।


__ यात्रियों के बीच बैठकर सुनी जनता की बात
__ पेट्रोल बचाने से आगे बढ़ा संदेश, ‘जनता के बीच जनप्रतिनिधि’ की दिखी नई तस्वीर
केटी न्यूज/डुमरांव
राजनीति में अक्सर नेताओं के लंबे काफिले और चमचमाती गाड़ियों की तस्वीरें देखने को मिलती हैं, लेकिन गुरुवार को डुमरांव के विधायक राहुल कुमार सिंह ने इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश की। उन्होंने बक्सर से पटना तक करीब 110 किलोमीटर का सफर किसी लग्जरी वाहन से नहीं, बल्कि मगध एक्सप्रेस के एमवन कोच में आम यात्रियों के बीच बैठकर पूरा किया। खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी निजी गाड़ी डुमरांव में ही खड़ी छोड़ दी और ट्रेन से यात्रा कर यह संदेश देने की कोशिश की कि जनप्रतिनिधि यदि चाहें तो आम लोगों की तरह सार्वजनिक परिवहन का हिस्सा बन सकते हैं।विधायक ने यात्रा के लिए विधिवत दो बर्थ आरक्षित कराए थे। सफर के दौरान उन्होंने यात्रियों से खुलकर बातचीत की, उनकी समस्याएं सुनीं और सुझाव भी लिए।

ट्रेन के डिब्बे में कई यात्रियों को पहले विश्वास ही नहीं हुआ कि उनके बीच बैठा व्यक्ति क्षेत्र का विधायक है। कुछ यात्रियों ने उनसे रेलवे सुविधाओं, रोजगार और स्थानीय समस्याओं को लेकर भी चर्चा की।राहुल कुमार सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचत को लेकर लगातार अपील की जा रही है और इसे केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि खुद सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे तो समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा। उनके अनुसार, ट्रेन और बस जैसे साधनों का अधिक उपयोग न केवल पेट्रोल-डीजल की खपत कम करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।यात्रा के दौरान विधायक ने पूरे सफर का वीडियो भी बनवाया, जिसे बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया। वीडियो में वे यात्रियों से बातचीत करते और सामान्य यात्रियों की तरह ट्रेन यात्रा का आनंद लेते दिखाई दिए।

सोशल मीडिया पर यह पहल तेजी से चर्चा का विषय बन गई। कई लोगों ने इसे “जमीन से जुड़ी राजनीति” की मिसाल बताया, तो कुछ ने कहा कि नेताओं को समय-समय पर इस तरह जनता के बीच जाकर उनकी वास्तविक समस्याओं को समझना चाहिए।स्थानीय लोगों का मानना है कि इस पहल का असर केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यह संदेश भी गया है कि सार्वजनिक सुविधाओं का उपयोग हर वर्ग के लोगों को करना चाहिए। विधायक ने आम लोगों से भी अपील की कि जहां संभव हो, निजी वाहनों की बजाय ट्रेन और बस जैसे सार्वजनिक साधनों को प्राथमिकता दें, ताकि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों की बचत जैसे राष्ट्रीय उद्देश्यों को मजबूती मिल सके।

