यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026: उच्च शिक्षा में भेदभाव के खिलाफ डुमरांव की सड़कों पर छात्र-युवा
उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और समावेश को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किए गए यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन, 2026 को सख्ती से लागू करने की मांग को लेकर डुमरांव में इंकलाबी नौजवान सभा और छात्र संगठन आइसा के बैनर तले जोरदार मार्च निकाला गया। यह मार्च डुमरांव थाना परिसर से शुरू होकर शहर की प्रमुख सड़कों से गुजरते हुए गढ़ चौक पहुंचा, जहां एक जनसभा का आयोजन किया गया।
-- नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग को लेकर निकला मार्च, गढ़ चौक पर हुई जनसभा
केटी न्यूज/डुमरांव
उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और समावेश को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किए गए यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन, 2026 को सख्ती से लागू करने की मांग को लेकर डुमरांव में इंकलाबी नौजवान सभा और छात्र संगठन आइसा के बैनर तले जोरदार मार्च निकाला गया। यह मार्च डुमरांव थाना परिसर से शुरू होकर शहर की प्रमुख सड़कों से गुजरते हुए गढ़ चौक पहुंचा, जहां एक जनसभा का आयोजन किया गया।सभा को संबोधित करते हुए डुमरांव के पूर्व विधायक एवं इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त संस्थागत भेदभाव को स्वीकार करने और उसे खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति, वर्ग और सामाजिक पहचान के आधार पर होने वाले भेदभाव के अनेक मामले सामने आते रहे हैं, जिन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया।डॉ. सिंह ने यूजीसी के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि बीते वर्षों में उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव से जुड़ी शिकायतों में भारी वृद्धि हुई है, जो यह दर्शाता है कि पुराने दिशा-निर्देश प्रभावी साबित नहीं हुए। उन्होंने कहा कि नए इक्विटी रेगुलेशन प्रशासनिक जवाबदेही तय करने, शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने और पीड़ित छात्रों को सुरक्षा देने का अवसर प्रदान करते हैं।सभा में वक्ताओं ने यह भी कहा कि इन नियमों में ओबीसी छात्रों को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना सामाजिक न्याय की दिशा में अहम उपलब्धि है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ वर्ग इन नियमों का विरोध “मेरिट” के नाम पर कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि समान अवसर सुनिश्चित किए बिना मेरिट की बात अधूरी है।वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि समानता कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है और इसे लागू करने की जिम्मेदारी सरकार एवं शैक्षणिक संस्थानों की है। कार्यक्रम में इनौस के जिला संयोजक राजदेव सिंह, धर्मेंद्र सिंह यादव, बीरन यादव सहित बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए।सभा के अंत में यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 को देशभर के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में अनिवार्य और पारदर्शी ढंग से लागू करने की मांग दोहराई गई।

